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छत्तीसगढ़

Kurasia Mines Water Crisis: कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस में गहराया जल संकट, प्रबंधन ने दिया नई पाइपलाइन का आश्वासन; जानें क्या है राहत योजना?

एमसीबी: कोयलांचल नगरी चिरमिरी स्थित एसईसीएल कॉलोनी में गहराते जल संकट ने श्रमिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया. गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे कर्मचारियों ने आखिरकार कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस के मुहाने पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे कोयला उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक कॉलोनी में पिछले कई दिनों से पानी की सप्लाई बाधित है.

लोगों का कहना है कि हालात इतने बिगड़ गए कि कर्मचारियों के घरों में हफ्तों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा. इससे नाराज होकर कर्मचारी खदान के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए और काम बंद कर दिया. कर्मचारियों का कहना था कि वे देश को ऊर्जा देने के लिए दिन-रात खदानों में मेहनत करते हैं, लेकिन उनके अपने घरों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.

खदान के गेट पर दिया धरना

धरने पर बैठे कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक वे खदान में काम नहीं करेंगे. इस अचानक विरोध के चलते खदान का कामकाज ठप पड़ गया और उत्पादन प्रभावित होने लगा. प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कुरासिया अंडरग्राउंड माइंस के उप क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों से बातचीत कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया. हालांकि, कर्मचारी तत्काल और ठोस समाधान की मांग पर अड़े रहे.

प्रबंधन ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने तत्काल कॉलोनी में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कराने का आश्वासन दिया. साथ ही यह भी कहा गया कि दो दिनों के भीतर नियमित जल आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी. प्रबंधन के इस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने धरना समाप्त कर दिया और पुनः खदान में काम शुरू कर दिया, जिससे उत्पादन धीरे-धीरे पटरी पर लौट आया

क्या है पानी संकट की असली वजह ?

उप क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण सिंह चौहान ने बताया कि कॉलोनी में पानी की कमी नहीं है, बल्कि तकनीकी समस्या के कारण पानी अंतिम फ्लोर तक नहीं पहुंच पा रहा है. उन्होंने कहा कि पाइपलाइन में प्रेशर ड्रॉप होने के कारण ऊपरी मंजिलों तक पानी नहीं पहुंचता. इस समस्या के समाधान के लिए नई लाइन (बाईपास लाइन) डाली जा रही है, जिससे सीधे सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि दो दिनों के भीतर व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त कर दी जाएगी.

कर्मचारियों का फूटा दर्द

कर्मचारी समीर देवनाथ ने कहा, हम लोग दिन-रात खदान में मेहनत करते हैं और देश को ऊर्जा देते हैं, लेकिन हमारे घरों में पानी नहीं है. कई बार मीटिंग और चर्चा हुई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. मजबूरी में हमें धरना देना पड़ा. बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं और ऐसे में पानी की किल्लत से परिवार बेहद परेशान है. एक और कर्मचारी जगबंधु ने कहा कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, पूरे सिविल क्षेत्र के लोग पानी और बिजली की समस्या से परेशान हैं. स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. यूनियन नेता ने प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा, कॉलोनी में कई-कई दिनों तक पानी नहीं आता. मजदूर टारगेट से ज्यादा उत्पादन करते हैं, लेकिन उनके घरों तक पानी नहीं पहुंचता. वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं दिखता.

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