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छत्तीसगढ़

Gangaur Festival 2026: धमतरी में धूमधाम से मनाया गया गणगौर पर्व, विधि-विधान से हुई माता की विदाई; मारवाड़ी समाज ने निकाली शोभायात्रा

धमतरी: शहर में गणगौर पर्व पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. 15 दिनों तक घर-घर माता गौरी और गौरा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना भक्तों ने की. जिसके बाद 16वें दिन बाजे-गाजे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणगौर पर्व का समापन हो गया. इस मौके पर शहर के अलग-अलग इलाकों से गणगौर की शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनका जगह-जगह स्वागत किया गया. इस दौरान महिलाएं राजस्थानी परिधान में सजी-धजी नजर आईं और बाजों की धुन पर नाचते गाते निकले.

गणगौर पर्व 2026

हर साल की तरह इस साल भी बाबा रामदेव मंदिर से गणगौर की भव्य शोभायात्रा निकाली गई. जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया. शोभायात्रा बाबा रामदेव मंदिर, इतवारी बाजार से शुरू होकर तहसील कार्यालय, कचहरी चौक, सदर बाजार, नूरानी चौक, भगत चौक, कोस्टापारा और नंदी चौक होते हुए शहर के कठोली तालाब पहुंची. यहां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर गणगौर पर्व का विधिवत समापन किया गया तथा महिलाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं.

पांडोली बनाकर माता की होती है स्थापना

स्वर्णकार समाज की महिलाओं ने बताया कि गणगौर पर्व होली के दूसरे दिन से शुरू होकर 16 दिनों तक मनाया जाता है. पहले 15 दिनों तक गणगौर माता घरों में विराजमान रहती हैं, जहां नियमित पूजा-अर्चना की जाती है और 16वें दिन भगवान शिव के आगमन के साथ माता गौरी की विदाई होती है. होली की रात पांडोली बनाकर गणगौर माता की स्थापना की जाती है और पूरे उत्सव के दौरान हल्दी, मेहंदी, पारंपरिक भोजन, गीत-संगीत और धार्मिक पूजा पाठ किए जाते हैं.

भगवान शिव और माता गौरी की होती है पूजा

भक्तों ने बताया कि ‘गणगौर’ दो शब्दों से मिलकर बना है ‘गण’ अर्थात भगवान शिव और ‘गौर’ अर्थात माता पार्वती. यह पर्व शिव-पार्वती के पवित्र स्वरूप का प्रतीक है. कुमारी युवतियां मनचाहा वर पाने और सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए 16 दिनों तक गणगौर की पूजा करती हैं. अंतिम दिन घर-घर से गणगौर निकालकर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की जाती है और पारंपरिक रीति से माता को विदाई देते हैं. विदाई के वक्त भक्तों की आंखे भर आती हैं.

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