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पंजाब

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अमृतसर: जहां एक ओर दुनिया भर में चल रहे जंग जैसे हालातों का असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, वहीं अब इसका सीधा प्रभाव पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम विद्यार्थियों तक पहुंच गया है। मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो बच्चों के पोषण और उपस्थिति को सुनिश्चित करती है, आज संकट में नजर आ रही है। अध्यापकों को मिड-डे मील तैयार करने के लिए गैस सिलैंडर प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण स्कूलों में खाना बनाने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

जानकारी के अनुसार पंजाब स्टेट मिड-डे मील सोसाइटी द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। स्कूल प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मिड-डे मील में गैस सिलैंडर का उपयोग सुनिश्चित किया जाए, लेकिन हालात यह हैं कि सिलैंडर मिलना ही मुश्किल हो गया है। कई अध्यापकों ने बताया कि उन्हें अपने निजी संपर्कों या काले बाजार से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। सरकारी आदेशों में कहा गया है कि स्कूलों में मिड-डे मील पकाने के दौरान सुरक्षा और स्वच्छता के नियमों का पालन अनिवार्य है, लेकिन जब बुनियादी संसाधन ही उपलब्ध न हों तो ये नियम केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। कई स्कूलों में ऐसी स्थिति बन गई है कि मिड-डे मील देर से बनता है या बच्चों को अधूरा भोजन मिल रहा है।

सिलैंडर न मिलने के कारण अध्यापक वर्ग परेशानी
डैमोक्रेटिक
 टीचर फ्रंट के अध्यक्ष अश्वनी अवस्थी ने कहा कि सिलैंडर न मिलने के कारण अध्यापक वर्ग भारी परेशानी में है। हमारा काम बच्चों को शिक्षा देना है, लेकिन हमें रोजाना सिलैंडर के लिए भटकना पड़ता है। जब गैस नहीं मिलती तो मिड-डे मील बनाना मुश्किल हो जाता है, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। कई बार गैस एजैंसियां भी सप्लाई में देरी करती हैं, जिससे स्कूलों की दिनचर्या प्रभावित होती है।

बच्चों की सेहत पर असर
शिक्षा
 विभाग की दफतरी यूनियन के अध्यक्ष अमन थरिएवाल ने कहा कि मिड-डे मील योजना बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन यदि यह योजना ही अधूरी रह जाए तो बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर गरीब परिवारों के बच्चे इस योजना पर निर्भर होते हैं। खाने में कमी या देरी होने से बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।

सरकार की जमीन पर हकीकत कुछ और सीनियर कांग्रेसी नेता और निगम में विपक्ष के नेता राजकंवलप्रीत सिंह लक्की ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। अगर बच्चों के खाने का प्रबंध भी सही तरीके से नहीं हो सकता, तो यह सरकार की नाकामी का प्रमाण है।

स्कूलों के लिए अलग गैस सप्लाई कोटा तय हो
हैडमास्टर
 यूनियन के अध्यक्ष विनोद कालिया ने कहा कि सरकार को तुरंत स्कूलों के लिए अलग गैस सप्लाई कोटा तय करना चाहिए ताकि मिड-डे मील योजना बिना रुकावट चल सके। अमृतसर में उन्हें खुद अधिकारियों की सिफारिश लगवाकर सिलैंडर लेना पड़ा है, जबकि पूरे पंजाब में गैस सिलैंडर को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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