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मध्यप्रदेश

दतिया में भाजपा की मुसीबत: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उपजे विरोध और डैमेज कंट्रोल की रणनीति

दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए टिकट वितरण ने भाजपा के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। नरोत्तम मिश्रा, जो लंबे समय से दतिया में सक्रिय थे, उनका नाम सूची से गायब होने पर समर्थक उग्र हो गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि हिंसक प्रदर्शन में 8 पुलिसकर्मी घायल हुए और कई वाहनों को नुकसान पहुंचा।

📢 नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय की अपील

हिंसा के बाद नरोत्तम मिश्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए अपने समर्थकों से शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि “यह पार्टी का फैसला है, आप अपनी बात सही मंच पर रखें, उग्र प्रदर्शन न करें।” वहीं, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने साफ संदेश दिया कि पार्टी में एक बार टिकट घोषित होने के बाद उसे बदलने की परंपरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।

🧐 क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?

जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • इंटरनल सर्वे: पार्टी के आंतरिक सर्वे में नरोत्तम मिश्रा की जीत की संभावना कमजोर आंकी गई थी।

  • एंटी-इनकंबेंसी: स्थानीय मतदाताओं और नेताओं के बीच मिश्रा के प्रति बढ़ रही नाराजगी को एक बड़ा फैक्टर माना गया।

  • पारिवारिक इकोसिस्टम: नरोत्तम मिश्रा के बेटे और उनके परिवार के इर्द-गिर्द बने पॉलिटिकल इकोसिस्टम को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं।

  • नया पावर सेंटर: पार्टी के अंदर चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा की वापसी एक नया ‘पावर सेंटर’ बना सकती थी, जिसे आलाकमान नियंत्रित करना चाहता है।

🚩 भाजपा का नया दांव: आशुतोष तिवारी

भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारकर ब्राह्मण फैक्टर और जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की है। तिवारी का आरएसएस बैकग्राउंड रहा है और वे स्थानीय गुटीय राजनीति से दूर माने जाते हैं। भाजपा के लिए चुनौती अब केवल दतिया की सीट जीतना नहीं, बल्कि मिश्रा के उस संगठनात्मक नेटवर्क को संभालना है जो सीधे तौर पर मिश्रा के प्रति वफादार है।

🛡️ डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा

अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘डैमेज कंट्रोल’ की है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा का संगठनात्मक नेटवर्क काफी गहरा है। भाजपा को विश्वास है कि वह समय रहते अपने कार्यकर्ताओं और नरोत्तम मिश्रा को मनाने में सफल रहेगी, लेकिन यह तय है कि इस उपचुनाव ने राज्य भाजपा की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है।

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