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झारखण्ड

रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर 35 दुकानों का 13 वर्षों से पेंडिंग है किराया, दुकानदारों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

रांची (झारखंड): राजधानी रांची के सबसे व्यस्त और महंगे व्यावसायिक क्षेत्रों में शुमार अल्बर्ट एक्का चौक के समीप स्थित 35 दुकानों का किराया पिछले 13 वर्षों से किसी भी सरकारी एजेंसी ने स्वीकार नहीं किया है।

अब इस प्रशासनिक लापरवाही और असमंजस की स्थिति को लेकर दुकानदारों ने झारखंड हाईकोर्ट की शरण ली है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लिया है तथा राज्य सरकार, रांची नगर निगम, रांची के उपायुक्त (DC), सदर अस्पताल प्रबंधन और रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (RRDA) से बिंदुवार जवाब तलब किया है।

🏛️ 2012 तक नगर निगम लेता था नियमित किराया, बाद में अधिकार क्षेत्र के विवाद में अटका मामला

याचिकाकर्ता रंजीत कुमार समेत 15 दुकानदारों द्वारा दायर याचिका में उल्लेख किया गया है कि इन 35 दुकानों का निर्माण आरआरडीए (RRDA) द्वारा कराया गया था, जबकि आवंटन की प्रक्रिया रांची नगर निगम ने पूरी की थी।

वर्ष 2012 तक रांची नगर निगम नियमित रूप से दुकानदारों से किराया वसूलता रहा, परंतु उसके पश्चात अचानक किराया स्वीकार करना बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक न तो नगर निगम किराया ले रहा है और न ही सदर अस्पताल प्रशासन।

📦 दुकानदारों में बेदखली का डर, हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने रखी पक्षकारों की बात

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने मीडिया को बताया कि किराया जमा न होने के पीछे दुकानदारों की कोई गलती नहीं है, बल्कि यह संबंधित सरकारी विभागों के बीच अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) की खींचतान है।

इसके बावजूद दुकानदारों को यह भयाक्रांत कर रहा है कि कहीं वर्षों से किराया बकाया रहने का आधार बनाकर उन्हें दुकानें खाली करने का नोटिस न जारी कर दिया जाए। समय-समय पर नगर निगम की टीम द्वारा की जाने वाली नाप-जोख से उनकी चिंताएं और बढ़ जाती हैं।

🏥 सदर अस्पताल की बाउंड्री में स्थित हैं दुकानें, अस्पताल प्रबंधन ने माना- ‘नहीं है अतिक्रमण’

अधिवक्ता के अनुसार, ये सभी 35 दुकानें सदर अस्पताल की चहारदीवारी (बाउंड्री) के भीतर स्थित हैं।

पूर्व में आयोजित सुनवाई के दौरान सदर अस्पताल प्रबंधन ने अदालत में यह स्वीकार किया था कि जमीन अस्पताल की है, परंतु इन दुकानों को अवैध कब्जा या अतिक्रमण नहीं माना जा सकता क्योंकि दुकानों का निर्माण विधिवत प्रक्रियाओं के तहत किया गया था।

💬 दुकानदारों की आपबीती: 1993 में अपने खर्च से कराया था निर्माण, डीसी से लेकर निगम तक लगाई गुहार

दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि वर्ष 1993 में अल्बर्ट एक्का चौक के बगल में सदर अस्पताल कैंपस के एक हिस्से में आरआरडीए द्वारा दुकानें आवंटित की गई थीं।

फंड के अभाव में जब निर्माण रुक गया, तो आवंटियों ने स्वयं अपने पैसे लगाकर दुकानों का निर्माण पूरा कराया था। 2012 में निगम द्वारा किराया बंद करने के बाद दुकानदारों ने डीसी, एसडीओ कोर्ट, नगर निगम और आरआरडीए का दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी भी एजेंसी ने किराया लेने में रुचि नहीं दिखाई।

एक अन्य दुकानदार सुरेश कुमार ने सवाल उठाया कि इसी लाइन की अन्य बड़ी दुकानों और होर्डिंग विज्ञापनों से नगर निगम नियमित राजस्व वसूल रहा है, तो उनके साथ ऐसा भेदभाव क्यों हो रहा है?

⚖️ अब अदालत तय करेगी कि किस विभाग को देना होगा किराया, हाईकोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब

व्यापारियों का कहना है कि वे नियमानुसार पूरा किराया चुकाने को तत्पर हैं, परंतु विभाग स्पष्ट न होने से कानूनी अनिश्चितता बनी हुई है।

उनकी मांग है कि जिला प्रशासन या अदालत यह स्पष्ट कर दे कि किराया किस एजेंसी के खाते में जमा कराया जाए। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद यह तय होगा कि दुकानों का वास्तविक प्रबंधन किस विभाग का है।

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