ब्रेकिंग
Jharkhand Rain Alert: रांची में मूसलाधार बारिश का कहर, खतरे के निशान के करीब पहुंचे डैम के जलस्तर Jamshedpur Bank Robbery: गोलमुरी केनरा बैंक डकैती में पुलिस का बड़ा एक्शन, 5 डकैतों पर 2-2 लाख का इन... Ranchi Police Action: जमशेदपुर हादसे के बाद अलर्ट पर रांची पुलिस, NH और रिंग रोड पर रातभर चला चेकिंग... Ophthalmological Conference Ranchi: 5वीं मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस का आगाज, AI और रोबोटिक सर्जरी पर हुआ मं... Indore Jhanki Results: अनंत चतुर्दशी चल समारोह में राजकुमार मिल की झांकी प्रथम, देखें विजेताओं की पू... Bhopal News Today: फाइव स्टार होटलों में ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़; फूड विभाग के छापे में सड़े मशर... IMD Weather Forecast: सितंबर के आखिरी हफ्ते में फिर सक्रिय हुआ मानसून, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में डिप्रे... Jabalpur-Bhopal NH-45 Toll News: जबलपुर-भोपाल हाईवे पर शाहपुरा टोल टैक्स वसूली पर रोक; नितिन गडकरी न... Nitin Gadkari Bhopal Visit: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सख्त रुख; RTO में भ्रष्टाचार पर बोले— 'गा... Mandla CMO Bribe Trap: मंडला में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई; 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़...
झारखण्ड

धनबाद IIT-ISM के प्रो. आलोक सिन्हा की नई खोज: 20 साल के लिए पेटेंट हुई अपशिष्ट जल शोधन की आधुनिक तकनीक

धनबाद (झारखंड): आईआईटी-आईएसएम (IIT-ISM) धनबाद के शोधकर्ताओं ने औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। संस्थान के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियंत्रण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक सिन्हा और उनके पीएचडी शोधार्थी डॉ. धर्मेंद्र सिंह द्वारा संयुक्त रूप से विकसित कोक ओवन उद्योगों के विषैले अपशिष्ट जल के शोधन की आधुनिक तकनीक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा आधिकारिक पेटेंट प्रदान कर दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह अत्याधुनिक तकनीक कारखानों से निकलने वाले विषाक्त अपशिष्ट जल को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित ढंग से शुद्ध करने में सहायक सिद्ध होगी।

🔬 ‘हाइब्रिड इलेक्ट्रो-फेंटन इलेक्ट्रो-ऑक्सीडेशन सिस्टम’ रखा गया नाम, 20 वर्षों तक प्रभावी रहेगा पेटेंट

आईआईटी-आईएसएम धनबाद में प्राध्यापकों द्वारा तैयार की गई इस नवोन्मेषी तकनीक का नाम ‘ए हाइब्रिड हेटेरोजीनियस 3डी इलेक्ट्रो-फेंटन बेस्ड इलेक्ट्रो-ऑक्सीडेशन सिस्टम’ (A Hybrid Heterogeneous 3D Electro-Fenton Based Electro-Oxidation System) रखा गया है।

इसे विशेष रूप से कोक ओवन एवं संबंधित भारी उद्योगों से निसृत होने वाले अत्यधिक प्रदूषित एवं जटिल अपशिष्ट जल के प्राथमिक व द्वितीयक उपचार हेतु अभिकल्पित किया गया है। इस महत्त्वपूर्ण आविष्कार हेतु मार्च 2025 में आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 22 जून 2026 को भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया। यह पेटेंट अधिकार आगामी 20 वर्षों तक संस्था के पास प्रभावी रहेगा।

🧪 फिनॉल और अमोनिया जैसे जहरीले रसायनों को निष्प्रभावी करेगी तकनीक: प्रो. आलोक सिन्हा

कोक ओवन उद्योगों से विसर्जित होने वाले अवशिष्ट जल में फिनॉल, अमोनिया, साइनाइड और कई अन्य अत्यंत घातक एवं कार्सिनोजेनिक रसायन उपस्थित रहते हैं।

इन विषैले रसायनों को पारंपरिक रासायनिक अथवा जैविक शोधन पद्धतियों से पूर्णतः पृथक करना सदैव से चुनौतीपूर्ण रहा है। इस नवीनतम तकनीक में विद्युत ऊर्जा और विशेष कैटेलिटिक पार्टिकल इलेक्ट्रोड्स का समन्वित उपयोग करके इन अति-हानिकारक तत्वों को कम हानिकारक अथवा सामान्य यौगिकों में रूपांतरित कर दिया जाता है। इससे जल शोधन प्रक्रिया की दक्षता में वृद्धि होती है और पर्यावरण में छोड़े जाने वाला निस्त्राव जल पूर्णतः स्वच्छ हो जाता है।

💬 “उद्योगों के साथ समाज को लाभ पहुँचाना हमारा ध्येय”: प्रो. आलोक सिन्हा, विभागाध्यक्ष

“हमारा मूल उद्देश्य ऐसी व्यावहारिक तकनीकों को विकसित करना है, जिससे उद्योगों के सुचारू संचालन के साथ-साथ संपूर्ण समाज और पर्यावरण को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचे। यह नवाचार औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाएगा तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को न्यूनतम करने में सहायक होगा। इस तकनीक से नदियों, भूजल स्रोतों और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को भी व्यापक मजबूती मिलेगी।”

📚 पर्यावरण अभियंत्रण के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं प्रो. आलोक सिन्हा, पहले भी प्राप्त कर चुके हैं पेटेंट

उल्लेखनीय है कि प्रो. आलोक सिन्हा पर्यावरण अभियंत्रण (Environmental Engineering) के क्षेत्र में देश के अग्रणी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों में से एक हैं।

उनके 60 से अधिक उच्च स्तरीय शोधपत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं तथा उनके कुशल मार्गदर्शन में 13 से अधिक शोधार्थी अपनी पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि पूर्ण कर चुके हैं। इससे पूर्व भी अपशिष्ट जल शोधन की नवीन तकनीक से संबंधित शोध पर उन्हें पेटेंट प्राप्त हो चुका है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद की इस उपलब्धि को देश में औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी सोपान माना जा रहा है।

Related Articles

Back to top button