आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय,शिक्षा मंत्री महोदय और तमाम राज्यों के सीएम साहब के नाम खुला पत्र
जब नीट पेपर नेशन वाइड तो काउंसलिंग के नाम पर अलग अलग खेल क्यों? वन कोर्स,सेम फीस क्यों नहीं ?

डॉ रजनीश कुमार झा
आज हम ऐसे मुद्दे को लेकर कुछ कहना चाह रहे हैं जिससे हर अभिभावक परेशान है। महोदय आजकल NEET पेपर को लेकर चर्चा हो रही है। NEET का पेपर नेशन वाइड होता है , उससे पहले हर राज्य अपना सीपीएमटी की परीक्षा कराते थे , फिर एक सुझाव दिया गया कि मेडिकल की प्रवेश परीक्षा पूरे देश में एक होनी चाहिए , चलिए अच्छा या बुरा जो भी सुझाव था तत्कालीन सरकारों ने उसे लागू किया और फिर पूरे देश में मेडिकल में प्रवेश के लिए एक परीक्षा का आयोजन किया जाने लगा ।

सरकार और छात्रों के लिए तो अच्छा कदम रहा लेकिन नीट के परिणाम के बाद अभिभावकों की परेशानी शुरू हुई। हमारे देश में जैसा कि सबको पता है कि सरकारी सीटों की अपेक्षा प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीट अधिक है, सरकार कोशिश कर रही है पर वो नाकाफी है। मसलन, इसी साल 9000 के करीब सीटों में इजाफा हुआ, उसमें से 7000 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की है। महोदय, अब असली परेशानी की बात देखिए। प्रवेश परीक्षा के बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू होती है। सबसे पहले एमसीसी काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करती है फिर उसके बाद सभी राज्य सरकारें
जैसा कि हजार 5 सौ रूपए लिए जा रहे हैं, यही हाल कमोबेश हर राज्य में है। अगर आप कम से कम दो-तीन राज्यों में भी नामांकन प्रक्रिया में शामिल होना चाह रहे हैं तो 5 लाख की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। भारत जैसे देश में ये कितना वाजिब है। ये केवल नामांकन प्रक्रिया में शामिमैंने ऊपर जिक्र किया कि अधिकांश बच्चे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के लिए भी रजिस्ट्रेशन करवाते हैं ,,एमसीसी इसके लिए 2 लाख 5 हजार की फीस लेता है, यूपी भी 2 लाख 2 हजार की राशि लेता है, राजस्थान की सरकार तो और कमाल की है वहां प्राइवेट कॉलेज के लिए सेक्युरिटी फीस 5 लाख है ।

अभिभावकों को आर्थिक तौर पर काउंसलिंग के जरिए परेशान किया जा रहा है। आप एमसीसी का रजिस्ट्रेशन करवाएं और सभी राज्यों की काउंसलिंग प्रकिया में भागीदार के लिए योग्य हो ऐसा कुछ प्रावधान किया जाए।

नामांकन के बाद प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस देखिए। भारत में बहुत सारे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं और डीम्ड क़ॉलेज हैं जो मनमानी लिखित फीस और हिडन फीस वसूल रहे हैं , उस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। अपनी मर्जी से डीम्ड कॉलेंजो ने सी साल एक लाख से 5 लाख तक की फीस वार्षिक तौर पर बढ़ा दी है, कोई पूछने वाला नहीं है। मौजूदा समय में भारत में 63 के करीब मेडिकल कॉलेज हैं जो डीम्ड हैं ,शिक्षा मंत्री और तमाम राज्यों के सीएम , शिक्षा मंत्री से आग्रह है कि एक बार अपने राज्य के प्राइवेट कॉलेजों का फीस स्ट्रक्रचर को देखिए( छत्तीसगढ़ को छोड़कर)। अंधाधुंध कमाई के पीछे सारे मेडिकल कॉलेज पड़े हैं।
महोदय अगर पूरे देश में 63 डीम्ड कॉलेज हैं तो सभी कॉलेजों की फीस एक जैसी क्यों नहीं है। आप लोग वन नेशन,वन इलेक्शन की बात करते हैं तो वन कोर्स सेम फीस की बात भी कर लीजिए। कुछ कॉलेज तो 35 लाख तक की सालाना फीस ले रहे हैं। तमिलनाडू भी उन राज्यों में शामिल है जहां के प्राइवेट कॉलेज मनमाना फीस ले रहे रहैं , वहां के नए और युवा सीएम से अनुरोध करता हूं कि वो भी एक बार अपने यहां के मेडिकल कॉलेजों की फीस सरंचना को देखें। सरकारी सीटें कम है, प्राइवेट अधिक इसका खामियाजा भारतीय बच्चों को भुगतना पड़ता है। पत्र काफी लंबा हो रहा है मैं देश के तमाम नीति निर्धारकों से अनुरोध करता हूं कि वो एक बार नीट परीक्षा परिणाम के बाद की प्रक्रियाओं को भी देखें।






