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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक कदम: FIR से फैसले तक जेंडर जस्टिस आधारित भाषा का होगा इस्तेमाल

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में यौन अपराध एवं अन्य संवेदनशील मामलों के पीड़ितों के साथ न्यायिक एवं पुलिस प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल होने वाली भाषा में बड़ा और सकारात्मक बदलाव होने जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के परिपालन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों (निचली अदालतों), पुलिस थानों और संबंधित विधिक विभागों को संवेदनशील तथा लैंगिक न्याय (जेंडर जस्टिस) पर आधारित शब्दावली अपनाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

🛡️ एफआईआर से लेकर फैसले तक गरिमा की रक्षा: पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणियों पर रोक

व्यवस्था के मुख्य बिंदु और उद्देश्य:

  • गरिमा और निजता की सुरक्षा: इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज होने से लेकर विवेचना, अदालती सुनवाई और अंतिम फैसले तक पीड़ित की गरिमा, निजता और आत्मसम्मान को पूरी तरह अक्षुण्ण बनाए रखना है।

  • पूर्वाग्रह से मुक्ति: अदालती कार्यवाहियों या पुलिस जांच के दौरान पीड़ित के चरित्र, निजी जीवन, व्यक्तिगत पृष्ठभूमि या सामाजिक स्थिति को लेकर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणी करने पर पूर्णतः रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • संवेदनशील न्यायिक तंत्र: इस कदम से लैंगिक समानता और संवेदनशीलता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पीड़ितों को न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी अतिरिक्त मानसिक आघात से न गुजरना पड़े।

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