महिला किसानों को बड़ी सौगात: झारखंड में जल्द शुरू होगी ‘महिला किसान खुशहाली योजना’

रांची (झारखंड): राज्य सरकार प्रदेश की महिला किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए जल्द ही एक विशेष योजना की शुरुआत करने जा रही है।
‘महिला किसान खुशहाली योजना’ के नाम से प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर नेपाल हाउस स्थित मंत्रालय सभागार में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में कृषि सचिव अबु बकर सिदिक, विशेष सचिव तथा सभी निदेशकों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में योजना की रूपरेखा, चयन प्रक्रिया, वित्तीय अनुदान और इसे आगामी कैबिनेट बैठक में स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
🌱 समेकित खेती पर विशेष फोकस: आय और आजीविका सुदृढ़ करने का लक्ष्य
योजना की पृष्ठभूमि और सरकार का विजन:
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फ्लैगशिप योजना के रूप में विकास: कृषि मंत्री ने बताया कि यह योजना राज्य की महिला कृषकों के लिए एक परिवर्तनकारी फ्लैगशिप योजना सिद्ध होगी।
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हितधारकों के सुझाव शामिल: योजना का प्रारूप तैयार करने से पहले विभिन्न कृषि संस्थाओं, विषय विशेषज्ञों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला किसानों के अनुभवों व परामर्शों को शामिल किया गया है।
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मुख्यमंत्री का निर्देश: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार राज्य में समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में निरंतर वृद्धि करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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बहुआयामी गतिविधियां: पारंपरिक फसलों के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को आपस में जोड़ना इस अभियान का मूल उद्देश्य है।
🚜 1 एकड़ भूमि पर विकसित होगा IFS मॉडल: साल भर होगी नियमित आय
एकीकृत कृषि प्रणाली का व्यावहारिक ढांचा:
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एक एकड़ का मानक आधार: शुरुआती चरण में प्रति लाभार्थी महिला किसान एक एकड़ भूमि को आधार मानकर समेकित कृषि मॉडल विकसित किया जाएगा।
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विविध घटकों का समावेश: भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय मांग के अनुरूप एक ही भूखंड पर बकरी पालन, सुअर पालन, बत्तख पालन, डेयरी (गाय पालन), मछली पालन और हॉर्टिकल्चर को संयोजित किया जाएगा।
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आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियां: नवीन कृषि तकनीकों के उपयोग से ऐसा समन्वित तंत्र बनेगा, जिससे महिला किसानों को वर्ष भर नकदी प्रवाह और आय के निरंतर स्रोत उपलब्ध हो सकें।
💰 तीन-चार प्रकार के मॉडल तैयार: सरकारी अनुदान और सीमित अंशदान का प्रावधान
वित्तीय रूपरेखा और लाभार्थी अंशदान:
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अलग-अलग मॉडल्स का निर्माण: कृषि विभाग द्वारा वर्तमान में 3 से 4 प्रकार के भिन्न-भिन्न आईएफएस मॉडल्स का खाका तैयार किया जा रहा है।
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अनुदान का निर्धारण: मॉडल को अंतिम रूप दिए जाने के उपरांत यह निर्धारित होगा कि किस श्रेणी में राज्य सरकार कितना वित्तीय अनुदान देगी और लाभार्थी का हिस्सा कितना होगा।
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स्वामित्व की भावना: योजना में अपनत्व और सक्रिय सहभागिता बनाए रखने के लिए लाभुक महिला किसान का न्यूनतम अंशदान तय किया जाएगा।
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अंशदान वापसी पर विचार: योजना के सफल एवं सतत संचालन पर लाभार्थी द्वारा दिए गए अंशदान को प्रोत्साहन राशि के रूप में वापस लौटाने के प्रावधान पर भी विभाग गंभीरता से मंथन कर रहा है।
👩🌾 व्यक्तिगत महिला किसान होंगी प्रथम लाभार्थी: कैबिनेट स्वीकृति की तैयारी अंतिम चरण में
कार्यान्वयन और आगामी प्रशासनिक कदम:
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महिला उद्यमी बनाने का लक्ष्य: प्रथम चरण के तहत यह सहायता व्यक्तिगत महिला कृषकों को सीधे प्रदान की जाएगी, ताकि वे मात्र मजदूरी न कर अपने पूरे खेत की एक कुशल प्रबंधक और उद्यमी बनें।
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प्रशासनिक प्रक्रिया तेज: विभाग इस योजना के समस्त तकनीकी, वित्तीय एवं नीतिगत पहलुओं को अंतिम रूप दे रहा है।
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मंत्रिपरिषद में प्रस्तुति: समस्त औपचारिकताएं पूर्ण होते ही योजना के प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद (Cabinet) के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।





