ब्रेकिंग
India's Deportation Plan: अवैध बांग्लादेशियों को कैसे वापस भेजेगा भारत? विदेश मंत्रालय ने संसद में ब... Maharashtra Police Raid: नांदेड़ में भारी मात्रा में तलवारें और खंजर जब्त; 43 लाख की कीमत के 4796 हथ... Judiciary vs Government: जजों की नियुक्ति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- चुनाव आयुक्तों जैसा ज... TVK Controversy: टीवीके विवाद के बीच क्यों चर्चा में आया 'बोम्मई जजमेंट'? जानें क्या है राजभवन और फ्... Maharashtra News: आंधी-तूफान में फंसा सीएम एकनाथ शिंदे का हेलीकॉप्टर; पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हा... Char Dham Yatra 2026 Alert: चार धाम यात्रियों के साथ बड़ी ठगी; सस्ते हेलीकॉप्टर टिकट और VIP दर्शन के... Bihar Crime News: ‘मिलने बुलाया, फिर फंसा दिया’... प्रेमी के गंभीर आरोप, मुजफ्फरपुर में कॉलेज के बाह... Chandranath Rath Murder Case: हमलावरों की बाइक के रजिस्ट्रेशन पर बड़ा खुलासा; जांच में आया नया मोड़,... Chandranath Rath Murder Case: हमलावरों की बाइक के रजिस्ट्रेशन पर बड़ा खुलासा; जांच में आया नया मोड़,... बस इतनी से बात पर ‘झुलसा’ परिवार, युवक ने पेट्रोल डालकर खुद को लगाई आग; पत्नी-सास भी घायल
देश

जानिए, एचसीक्यू को बदनाम करने के लिए कैसे हो रही है अंतरराष्ट्रीय साजिश!, ICMR देगा दुष्‍प्रचार का जवाब

नई दिल्ली। साइंस जर्नल लांसेट भले ही हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन (एचसीक्यू) पर प्रकाशित शोधपत्र के डाटा की जांच कर रहा हो और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसकी ट्रायल फिर से शुरू कर दी है, लेकिन इससे गहरे अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका गहरा गई है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस को रोकने में एचसीक्यू के कारगर होने की पुष्टि होने के साथ ही इसके खिलाफ साजिश की शुरुआत हो गई थी। लांसेट में प्रकाशित कथित शोध उसी की परिणति है। साजिश की पुष्टि इस बात से भी होती है कि पहले एचसीक्यू के कोरोना मरीजों के लिए जानलेवा साबित होने के दावे किए गए। इस दावे की हवा निकलने के तत्काल बाद कोरोना वायरस को रोकने में इसके कतई भी असरकारी नहीं होने की बात कही जाने लगी है।

पिछले 80 सालों से हो रहा है इस दवा का इस्‍तेमाल 

वैसे तो आइसीएमआर का कोई भी वैज्ञानिक इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से बोलने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन, उनका साफ कहना है कि 80 सालों से पूरी दुनिया में इस दवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है और कभी इस पर जानलेवा होने का आरोप नहीं लगा। मलेरिया के इलाज में इसका व्यापक इस्तेमाल तो होता ही रहा है, साथ ही मलेरिया से बचने के लिए पहले ही इसके इस्तेमाल की इजाजत दी गई है। उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका के लोगों को मलेरिया प्रभावित एशिया व अफ्रीका जाने के पहले सामान्य रूप से इसे दिया जाता रहा है

लांसेट में छपे शोधपत्र में फर्जी आंकड़ों का किया गया इस्तेमाल

लांसेट के शोध के पीछे बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हुए आइसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि पूरी दुनिया से 96 हजार मरीजों का डाटा जुटाने वाली अमेरिका स्थित सर्जीफेयर कंपनी के सीईओ तपन देसाई ने इसका स्त्रोत बताने से इन्कार कर दिया है। इस डाटा के फर्जी होने का सबसे बड़ा सुबूत यह है कि इसमें आस्ट्रेलिया में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या उनकी वास्तविक संख्या से अधिक दिखाई गई

आंकड़ों के आधार पर जवाब देने में जुटा आइसीएमआर

आइसीएमआर एचसीक्यू को बदनाम करने की कोशिशों का आंकड़ों के आधार पर जवाब देने की तैयारी में जुटा है। आइसीएमआर के अनुसार एचसीक्यू कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में 80 फीसद तक सफल पाया गया है। इसी कारण इसे कोरोना के इलाज व प्रबंधन में लगे सभी फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को देने फैसला किया गया है। आइसीएमआर कोरोना संक्रमण को रोकने में एचसीक्यू पर किए गए अध्ययन का वैज्ञानिक डाटा अगले हफ्ते सार्वजनिक करेगा।

Related Articles

Back to top button