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Shahdol Elephant Threat: बाणसागर के 25 हाथियों के आतंक से ग्रामीणों को बचाएगी DFO तरुणा वर्मा की नई रणनीति

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्थित पश्चिम ब्यौहारी के बाणसागर डैम के बैक वॉटर क्षेत्र में लगभग 25 हाथियों का झुंड लंबे समय से डेरा डाले हुए है। इस झुंड ने अब इस इलाके को अपना स्थायी निवास बना लिया है। इसके अलावा पड़ोसी बांधवगढ़ नेशनल पार्क से भी हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। हाथियों की इस आवाजाही के कारण आसपास के ग्रामीण अंचलों में कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने और मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) की आशंका गहरा गई है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए उत्तर वन मंडल की डीएफओ तरुणा वर्मा ने एक विशेष सुरक्षा प्लान तैयार किया है।

🛖 अनाज की तलाश में कच्चे मकानों को बना रहे निशाना: पुरुषों के पलायन से महिलाओं पर बढ़ा जोखिम

डीएफओ तरुणा वर्मा ने बताया कि हाथियों की मुख्य विचरण रेंज वेस्ट ब्यौहारी, ईस्ट ब्यौहारी और गोदावल क्षेत्र है।

इस पश्चिमी इलाके में रहने वाले अधिकांश ग्रामीण आज भी कच्चे मकानों में ही गुजर-बसर कर रहे हैं। फसल कटाई के बाद ग्रामीण घरों में अनाज स्टोर करके रखते हैं, जिसे खाने के लालच में हाथी कच्चे मकानों को तोड़ देते हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र के अधिकांश पुरुष आजीविका के लिए बाहर मजदूरी करने चले जाते हैं, जिससे घरों में रहने वाली महिलाएं और बच्चे खतरे के साये में जीने को मजबूर हैं।

📋 20 गांवों के 717 कच्चे मकानों की सूची तैयार: डीएफओ ने कलेक्टर से पीएम आवास की सिफारिश की

हाथियों के प्रकोप से ग्रामीणों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डीएफओ तरुणा वर्मा ने एक व्यावहारिक कदम उठाया है।

उन्होंने अति-संवेदनशील 20 गांवों के 717 कच्चे मकानों की विस्तृत सूची तैयार कर शहडोल कलेक्टर को सौंपी है। डीएफओ ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि यदि इन प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) के तहत पक्के मकान स्वीकृत कर दिए जाएं, तो हाथियों के हमलों से उनके जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

🌾 फसलों के सीजन में बढ़ता है मानव-हाथी संघर्ष का डर: पक्के मकानों से मिलेगी सुरक्षा

फसलों के पकने के समय जब हाथियों का दल खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करता है, तब सबसे ज्यादा जान-माल के नुकसान का खतरा रहता है।

खेतों में लगी फसलें खाने के दौरान हाथी अक्सर आसपास बने कच्चे घरों को पूरी तरह ध्वस्त कर देते हैं। वन विभाग का मानना है कि यदि ग्रामीणों के पास पक्के छत वाले मकान होंगे, तो हाथियों द्वारा मकान ढहाने की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और जनहानि के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

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