UP Politics: ‘नौकरी छोड़ ई-रिक्शा चलाओ’ वाले बयान पर घिरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, बचाव में उतरे ओपी राजभर

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा युवाओं के रोजगार को लेकर दिए गए एक बयान पर राज्य में राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है।
डिप्टी सीएम ने युवाओं को सुझाव देते हुए कहा था कि वे केवल सरकारी नौकरी के पीछे न भागें, बल्कि ई-रिक्शा चलाने जैसे स्वरोजगार अपनाएं और अपने परिवार व बच्चों के साथ बेहतर समय बिताएं।
इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों—समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस—ने इसे युवाओं का अपमान बताते हुए सरकार की रोजगार नीति पर तीखा हमला बोल दिया है। दूसरी तरफ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर खुलकर डिप्टी सीएम के बचाव में उतर आए हैं।
🛡️ ‘हमने भी टेम्पो चलाया, आज सरकार चला रहे हैं’: बचाव में उतरे कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर
डिप्टी सीएम के समर्थन में राजभर का तर्क:
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पूरी आबादी को नौकरी संभव नहीं: मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस बयान में कुछ भी अनुचित नहीं है। उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और किसी भी सरकार के लिए हर एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देना मुमकिन नहीं है।
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योग्यता और स्वरोजगार: उन्होंने कहा कि जो योग्य हैं, उन्हें सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। जिन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही, वे स्वरोजगार या अन्य काम कर सकते हैं; डिप्टी सीएम ने भी यही समझाने का प्रयास किया है।
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निजी अनुभव का हवाला: राजभर ने अपने शुरुआती दिनों का उदाहरण देते हुए कहा, “हमने भी कभी टेम्पो चलाया था और आज राज्य में सरकार चला रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मेहनत का कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता।
🚗 ‘भारत टैक्सी’ ऐप लॉन्चिंग के दौरान दिया गया था बयान: स्वरोजगार अपनाने की दी थी सीख
कार्यक्रम और बयान की पृष्ठभूमि:
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योजना का शुभारंभ: यह पूरा घटनाक्रम लखनऊ में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम का है, जहां उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ‘भारत टैक्सी’ सेवा का शुभारंभ करने पहुंचे थे।
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ड्राइविंग जानने वालों को सलाह: कार्यक्रम में युवाओं को आत्मनिर्भर और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा था कि जिन युवाओं को ड्राइविंग आती है, वे बेरोजगार बैठने या नौकरियों के पीछे भागने के बजाय खुद का साधन चलाएं।
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परिवार के साथ समय का तर्क: उन्होंने कहा था कि ई-रिक्शा या टैक्सी चलाकर युवा न केवल सम्मानजनक आजीविका कमा सकते हैं, बल्कि अपने गृह क्षेत्र में रहकर अपने परिवार और बच्चों के साथ सुखद समय भी व्यतीत कर सकते हैं।
⚡ चुनावी माहौल में गरमाई सियासत: विपक्ष ने रोजगार नीति को लेकर सरकार को घेरा
विपक्ष का पलटवार और युवाओं की नाराजगी:
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सपा का कड़ा विरोध: बयान वायरल होते ही समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया और इसे युवाओं की मेहनत का मजाक बताया।
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‘पकौड़ा और ई-रिक्शा’ पर तंज: विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार लाखों युवाओं को रोजगार और नौकरियां देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ पढ़े-लिखे नौजवानों को पकौड़े तलने और ई-रिक्शा चलाने की नसीहतें दी जा रही हैं।
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सोशल मीडिया पर बहस: सोशल मीडिया और सियासी मंचों पर इस बयान को लेकर तीखी बहस जारी है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र और युवा वर्ग भी इस टिप्पणी पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।




