JNU Health Center Protests: जेएनयू हेल्थ सेंटर की बदहाली के खिलाफ एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना जारी, 100 घंटे से अधिक बीते

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्वास्थ्य केंद्र की चरमराई चिकित्सा व्यवस्थाओं, आवश्यक सुविधाओं के भारी अभाव और विद्यार्थियों के साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का अनिश्चितकालीन धरना 100 घंटे से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी लगातार जारी है।
इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद जेएनयू प्रशासन की ओर से न तो विद्यार्थियों की जायज मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही प्रशासन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत करने आया है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील और बुनियादी विषय पर विश्वविद्यालय प्रशासन की यह उदासीनता और चुप्पी उसकी गंभीर संवेदनहीनता को दर्शाती है। एबीवीपी का स्पष्ट कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ हुई धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
⚖️ सीएमओ के इस्तीफे और 24×7 मेडिकल ऑडिट की मांग: छात्रों ने उठाई मुखर आवाज
संगठन द्वारा रखी गई प्रमुख मांगें और बिंदु:
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सीएमओ का इस्तीफा: एबीवीपी ने स्वास्थ्य केंद्र के सीएमओ की जवाबदेही तय करने और तत्काल प्रभाव से उनके इस्तीफे की मांग दोहराई है।
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पूर्ण मेडिकल व प्रशासनिक ऑडिट: संगठन ने मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्र का निष्पक्ष मेडिकल, प्रशासनिक और वित्तीय ऑडिट कराया जाए ताकि अनियमितताओं की परतें खुल सकें।
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चौबीसों घंटे चिकित्सा सुविधा: जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा 24×7 (सातों दिन, चौबीसों घंटे) उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में किसी भी छात्र को परेशानी न उठानी पड़े।
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पर्याप्त संसाधन: स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त चिकित्सकों, आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
📣 प्रशासन की चुप्पी पर फूटा गुस्सा: आंदोलन जारी रखने की दो टूक चेतावनी
छात्र नेताओं के बयान और रुख:
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मयंक पांचाल का बयान: एबीवीपी जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि 100 घंटे से अधिक समय से विद्यार्थी धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई पहल न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत के लिए छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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प्रवीण के. पीयूष की चेतावनी: एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने कहा कि हमारा सीधा सवाल है कि जब छात्र अपने सम्मान और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं, तो प्रशासन उनसे संवाद क्यों नहीं कर रहा? जब तक सीएमओ का इस्तीफा, 24×7 चिकित्सा सेवा और निष्पक्ष ऑडिट जैसी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
🌿 संघर्ष के साथ विरासत का सफर: पहाड़ों और गुफाओं का विजिट
आंदोलन के बीच विद्यार्थियों की सकारात्मक सहभागिता:
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कैंपस विजिट का आयोजन: अपने अधिकारों की लड़ाई के साथ-साथ एबीवीपी जेएनयू ने विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय परिसर की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत से रूबरू कराने हेतु ‘पहाड़ों और गुफाओं का विजिट’ आयोजित किया।
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बड़ी संख्या में भागीदारी: इस विजिट में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कैंपस के प्राकृतिक परिवेश से जुड़े।
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सकारात्मक जुड़ाव: छात्रों के बुनियादी मुद्दों को लेकर कड़े संघर्ष के साथ-साथ उन्हें विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक और भौगोलिक विरासत से जोड़े रखना भी संगठन की निरंतर गतिविधियों का एक अहम हिस्सा रहा है।





