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नक्‍शा विवाद पर भारत की दो टूक, विदेश मंत्रालय ने कहा- नेपाल से साफ कर है अपनी स्‍थ‍िति

नई दिल्ली। नेपाली संसद में नए नक्शे को मान्यता देने के लिए संविधान संशोधन के लिए जारी बहस के बीच भारत ने नेपाल के साथ अपने दोस्ताना संबंधों को अपने लिए बहुत अहम बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि सीमा विवाद पर हमने नेपाल से अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है। आनलाइन ब्रीफिंग में प्रवक्ता ने कहा कि भारत नेपाल के साथ अपने दोस्ताना रिश्तों की बहुत कद्र करता है। श्रीवास्‍तव (Anurag Srivastava) ने उम्‍मीद जताई कि नेपाल दोनों देशों के सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का खयाल रखेगा।

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि हाल के वर्षों में हमने नेपाल के साथ विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी की है जो निरंतर बढ़ी है। भारत सरकार ने नेपाल के विकास के लिए मानवीय आधार पर बहुत मदद की है। कोरोना से निपटने के लिए हमने नेपाल को 25 टन दवाएं व चिकित्सा उपकरण भिजवाए हैं। भारत सरकार की यह भी कोशिश रही कि लॉकडाउन के कारण दोनों देशों का व्यापार प्रभावित न हो। इतना ही नहीं कोरोना काल में विदेश में फंसे कई नेपाली नागरिकों को भी भारत ने उनके घर पहुंचाने में मदद की है।

यह भी बता दें कि नेपाल की संसद में संविधान संशोधन को लेकर जारी बहस के बाद शनिवार को मतदान हो सकता है। नेपाल ने भारतीय क्षेत्र में पड़ने वाले लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र में दर्शाते हुए नया नक्शा बनाया है। इस नक्शे को मान्यता के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है। नेपाल के इस कदम पर भारत पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है।

इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा है कि उनकी सरकार राजनयिक प्रयासों और ऐतिहासिक तथ्यों तथा दस्तावेजों के आधार पर संवाद के जरिए कालापानी मुद्दे का समाधान तलाश करेगी। ओली ने बुधवार को संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि हम बातचीत के जरिये भारत द्वारा कब्जाई गई जमीन वापस हासिल करेंगे। ओली ने यह दावा दोनों देशों के दरम्यान चल रहे सीमा विवाद के बीच किया है।

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