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अपनी जान की परवाह किए निभा रहे अपनी जिम्मेदारी

रायपुर। कोरोना काल को शायद ही कोई अपने जेहन से निकाल पाएगा। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए करीब 20 दिन से अपने घरों में कैद हैं। इस कोरोना में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जो अपनी जान की परवाह न कर दूसरों की सेवा में समर्पित हैं। कोरोना काल में रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में एंबुलेस चला रहे लोग मानवता का निवर्हन कर रहे हैं। कोरोना काल में अपनी सेवा भाव से एंबुलेंस चालकों ने सबका दिल जीत लिया है।

रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में मुक्तांजलि वाहन चालक रितेश जोशी धमतरी से रोजोना अप डाउन करते हैं। पहले वह अपने घर की गाड़ी चलाया करते थे, लेकिन किसी कारण बस वह पिछले तीन माह से आंबेडकर अस्पताल में मुक्ताजंजलि चला रहे हैं।

रितेश जोरी एक एंबुलेंस चालक की डयूटी से इतर पूर्ण सेवा भाव से मरीजों के साथ कोरोना से मृत मरीजों के परिजनों के लिए मसीहा बनकर आए हैं। एंबुलेंस चालक अपनी जान की फिक्र किए बगैर कोरोना पीडि़तों को समय से अस्पताल पहुंचाने व फिर मृत मरीज के अंतिम संस्कार के लिए शव स्थल पर पहंचाने के लिए मदद कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कोरोना से पूर्व भी मरीजों को अस्पताल लाने एवं उनके उपचार को लेकर उनकी संवेदनशीलता अलग रही है। ऐसे में कोरोना के दौरान जिम्मेदारी अधिक रहती है।

मानवता बड़ी चीज

रितेश जोशी बताते है कि उन्हे भी संक्रमण का भय रहता था, लेकिन दुनिया में मानवता बड़ी चीज होती है। वह भगवान पर भरोसा करते हैं। उन्होंने बताया कि इस संक्रमण की चपेट में पूरा देश आ गया है। इस दौरान हर आदमी को अपना फर्ज निभाना चाहिए। यदि हम लोग ऐसा नहीं करेंगे तो कौन करेगा। उन्होंने बताया कि वह सुरक्षा का पूरा ख्याल रखते हैं। पीपीकीट पहनकर गाड़ी चलाते हैं। गाड़ी को बराबर सैनिटाइज करते हैं। एक बार के बाद पीपीकीट उताकर उसे डिस्पोज के लिए दे देते हैं।

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