नेशनल लोक अदालत में 36 हजार प्रकरणों की होगी सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट एक बार फिर कीर्तिमान बनाने की ओर अग्रसर हो रहा है। कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान ई नेशनल लोक अदालत का गठन किया था। इसके जरिए प्रकरणों की सुनवाई की गई थी। जस्र्रतमंदों को आर्थिक मदद का आदेश भी जारी किया गया था। लाकडाउन के कारण बीते एक वर्ष से प्रदेशभर के जिला अदालत सहित अधिनस्थ न्यायालयों में कामकाज बंद था। जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन भी बंद कर दिया गया था।
जस्र्रतमंद हितग्राहियों को केंद्र व राज्य शासन की योजनाओं का लाभ भी मिल रहा था। यह पहला अवसर था जब छग हाई कोर्ट ने ई नेशनल लोक अदालत का गठन करने के अलावा केंद्र व राज्य शासन की विभिन्न् जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को गति देने के लिए जनसमस्या निवारण शिविर की तर्ज पर विभागवार योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया था।
10 जुलाई को दूसरी नेशनल ई लोक अदालत लगेगी जिसमें प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। इसके लिए छग हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस प्रशांत मिश्रा के निर्देशन में 322 खंडपीठों का गठन किया गया है। इसमें राजीनामा योग्य प्रकरणों को पक्षकारों की आपसी समझौता से निराकृत किया जाएगा।
मजिस्ट्रेट को स्पेशल सीटिंग का अधिकार
कार्यवाहक चीफ जस्टिस व कार्यपालक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण प्रशांत मिश्रा के निर्देशानुसार मजिस्ट्रेट को स्पेशल सीटिंग की शक्ति प्रदान की गई है। जिसके चलते मजिस्ट्रेट अपनी शक्तियों का प्रयोग कर राजीनामा के अतिरिक्त छोटे मामलों में स्वीकृति के आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता एवं मामूली अपराध के प्रकरणों को भी सुनवाई के लिए रखकर निराकृत करेंगे।
इन प्रकरणों की होगी सुनवाई
लोक अदालत मे ंपरिवार न्यायालय, स्थाई लोक अदालत, श्रम न्यायालयों के प्रकरण, बैंक वसूली, बिजली, पानी, श्रम न्यायालय मोटर दुर्घटना के प्रकरण, वैवाहिक मामले, धारा 138 चेक बाउंस मामले, समस्त सिविल मामले जो न्यायालय में लंबित है, इसके अलावा ऐसे मामले जो न्यायालय में अभी पेश नहीं हुए हैं, (प्री-लिटिगेशन) को निराकृत किया जाएगा। इसके अलावा पक्षकारों के मध्य लोक अदालत की तिथि के पूर्व प्री-सिटिंग के माध्यम से भी प्रकरणों को निराकृत किए जाएंगे।





