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धर्म से जुड़ेंगे तभी धर्म में मन लगेगा : साध्वी शुभंकरा

रायपुर: अध्यात्म का सहारा लेकर ही हम अपने जीवन में उत्साह, ऊर्जा, उमंग का संचार कर सकते हैं। जिस व्यक्ति के मन में धर्म और ईश्वर के प्रति श्रद्धा होती है, वह कठिन परिस्थति में भी धैर्य बनाए रखता है और परमात्मा की कृपा उस पर देर-सबेर अवश्य होती है। यदि आप धर्म से जुड़ें रहेंगे तभी आपका मन धार्मिक कार्यों में लगेगा। सत्संग से ही हमारी आत्मा पवित्र होती है। धर्म की ओर जाने का सही मार्ग सत्संग है। धर्म गुरुओं के प्रवचन सुनकर उन्हें आत्मसात करें। उक्त संदेश सदरबाजार स्थित श्री ऋषभदेव जैन मंदिर में साध्वी शुभंकरा ने दिया।
साध्वीश्री ने कहा कि यदि आप धर्म से जुड़े रहेंगे तो धीरे-धीरे आपका मन धर्म, ध्यान में अवश्य लगेगा। जब धर्म करेंगे तब मन नहीं लगेगा। बेमन से ही सही धर्म, पूजा-पाठ करते रहें, एक न एक दिन मन लग ही जाएगा। यदि जीवन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है तो परमात्मा पर भरोसा रखें। आपके जीवन में शुभ समय निश्चित ही आएगा।
कर्म मिमांशा सूत्र पर साध्वीश्री ने कहा कि यदि इस सूत्र को हम अपने जीवन में उतार लें तो हमारा जीवन धन्य हो जाएगा। यदि कंप्यूटर में वायरस घुस जाए तो कंप्यूटर बंद हो जाता है, अथवा उसकी स्पीड कम हो जाती है। वायरस को खत्म करने के लिए एंटी वायरस अपलोड करना होता है। इसी तरह मनुष्य की बुद्धि जब मंद हो जाती है और उसकी प्रगति में बाधा आती है तब धर्म रूपी वायरस उसके जीवन में नए उत्साह का संचार करती है। कभी कुछ गलत न हो इसके लिए सत्संग, भक्ति, पूजा-पाठ में ध्यान दें। संतों, ज्ञानियों के समक्ष बैठें और उनकी बताई बातों पर अमल करें। आपके जीवन में अहम बदलाव आएगा।
सत्संग में जब धर्म गुरु कुछ उपदेश दें तो उसे आत्मसात करें, ऐसा न हो कि सत्संग स्थल से निकलने के बाद सब कुछ भूल जाएं। यदि ऐसा करते हैं तो आपके सत्संग में आने का कोई मतलब नहीं है। प्रतिदिन कुछ न कुछ सीख लेकर जाएं और उस पर चिंतन, मनन करके व्यवहार में लाने का प्रयास करें। चार माह के चातुर्मास में सुने गए प्रवचन से आपका जीवन सुधर जाएगा।

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