बिलासपुर जिले के प्रभारी मंंत्री ने रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगाने एसडीएम को दी हिदायत

बिलासपुर। अरपा सहित जिले की नदियोें से रेत का अवैध उत्खनन लगातार जारी है। मापिफया मशीनों के जरिए रेत का उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतोें को देखते हुए जिले के प्रभारी मंंत्री अग्रवाल ने अनुविभागीय अधिकारी को इस पर रोक लगाने और कार्रवाई का निर्देश दिया है।
जिला पंचायत सदस्य मीनू सुमंत यादव ने एक बार फिर से रेत के अवैध उत्खनन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अवैध उत्खनन पर रोक लगाने कलेक्टर को पत्र लिखने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने बाद मामले की शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री जय सिंह अग्रवाल से की है। जिले के प्रभारी मंत्री ने एसडीएम को तलब कर सभी अवैध रेत घाट पर उत्खनन पर रोक लगाने का निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत सदस्य मीनू ने लिखित में जिला प्रशासन को बताया कि निरतु और तुरकाडीह ,लोखड़ी और सेंदरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण और जागरूक गांव है। यहां अवैध रेत घाट से दादागिरी के साथ रोजाना 200 से 300 हाईवा रेत अवैध घाट से निकाला जा रहा है। इससे अरपा का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। मामले में कई बार मौखिक शिकायत जनप्रतिनिधि होने के नाते की, ग्रामीणों ने भी कई बार विरोध किया।
बावजूद इसके ठोस कार्रवाई नहीं होने से रेत माफियों का हौसला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मीनू यादव ने राजस्व मंत्री को बताया कि लगातार अवैध उत्खनन से अरपा में जगह जगह चालिस से पचास फिट मौत का कुंआ तैयार हो गया है। इसके चलते क्षेत्र की जनता में आक्रोश दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। यदि लिखित शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया गया और निरतू व तुरकाडीह में अवैध रेत उत्खनन को लगाम नहीं लगाया गया तो उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मीनू ने बताया कि हम सभी लोग जानते हैं कि करोड़ों रूपयों से तैयार तुरकाडीह पुल में आयी खामियों की मुख्य वजह रेत का अवैध उत्खनन ही है। बावजूद इसके रेत माफियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है। जिला पंचायत सदस्य ने जिले के प्रभारी मंत्री को जानकारी दी कि कलेक्ट से श्किायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है।
हाई कोर्ट में जनहित याचिक
अरपा अर्पण महाभियान समिति ने छत्तीसगढ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता समिति ने अरपा नदी से रेत उत्खनन पर रोक लगाने की मांग भी की है। हाई कोर्ट की नोटिस के बाद राज्य शासन व पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कोर्ट के समक्ष जवाब पेश कर दिया है।






