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भाजपा सांसद ने जीतन राम मांझी व मुकेश सहनी को ललकारा, कहा- दो कमजोर जानवर शेर का शिकार नहीं कर सकते

मुजफ्फरपुर‌। सूबे का पारा भले ही दिन-ब-दिन कम होता जा रहा है, लेकिन राजनीतिक तापमान में कोई कमी होती नहीं दिख रही है। जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) और मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) की बैठक और अलग-अलग मंच से सीएम नीतीश कुमार की सरकार से समर्थन वापसी की बात कहने पर भाजपा ने पलटवार किया है। मुजफ्फरपुर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद व प्रदेश उपाध्यक्ष अजय निषाद (Ajay Nishad) ने दोनों की पार्टियों को कमजोर जानवर करार दिया है। कहा- दो कमजोर (हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा व विकासशील इनसान पार्टी) जानवर शेर (बीजेपी) का शिकार नहीं कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने की घोषणा पर एक बार फिर उन्होंने मुकेश सहनी को चेतावनी दी है। इसपर विकासशील इनसान पार्टी (VIP) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

भारतीय जनता पार्टी का बड़ा जनाधार

मीडिया से बात करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि दो कमजोर जानवर शेर का शिकार नहीं कर सकते हैं। बीजेपी शेर है। आज बिहार की जनता देख रही है कि बीजेपी का कितना बड़ा जनाधार है। गरीब लोगों का विकास हो रहा है। दलित,पिछड़ों व महिलाओं को साथ में लेकर पार्टी चल रही है। सबका साथ, सबका विकास व सबका विश्वास, इस मूल मंत्र के साथ काम हो रहा है। इसलिए केंद्र व राज्य दोनों जगह की सरकार पूरी तरह से मजबूत है। इसको लेकर किसी को भी गफलत में रहने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में चौतरफा विकास की लहर चल रही है। बीजेपी में सबका सम्मान है

बोचहां बीजेपी की परंपरागत सीट

सांसद अजय निषाद ने वीआइपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में ताल ठोंकने से परहेज करने की एक बार फिर से सलाह दी है। कहा, सहनी संयुक्‍त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) व राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), दोनों से चुनाव लड़े और दोनों ही बार हार गए। उनका कोई जनाधार नहीं है। खुद को सन आफ मल्लाह कहते तो हैं, लेकिन समाज में कोई पकड़ नहीं है। इस हालत में यदि वे यूपी में चुनाव लड़ने की अपनी जिद से पीछे नहीं हटते हैं तो मुजफ्फरपुर की बोचहां विधानसभा सीट से शायद हाथ धाेना पड़ जाए। वैसे भी यह बीजेपी की सीट रही है और वह यहां से बेहतर प्रदर्शन करने को तैयार है। उन्होंने साफ किया कि यदि मुकेश सहनी योगी-योगी नहीं करेंगे तो बिहार में उनका रास्ता भी रोक दिया जाएगा।

विधायक ही मुकेश सहनी की नहीं करते इज्जत

बीजेपी सांसद ने आरोप लगया कि मुकेश सहनी सहनी के कथनी व करनी में अंतर है। उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव में 11 सीटें मिली थीं, लेकिन उन्होंने निषाद समाज के नेताओं को को कितना टिकट दिया, यह सब देख रहे हैं। वे राजनीति में व्यवसाय करने आए हैं। अब भी पिछले दरवाजे से विधानपरिषद में जाने का काम किया है। उनका हाल है कि आज उनके पार्टी के विधायक उनका कदर नहीं करते। अपने समाज के लोग विधायक होते तो सम्मान करते।

आरोपाें पर वीआइपी ने भी किया पलटवार

उक्‍त आरोपाें पर पलटवार करते हुए वीआइपी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता देवज्‍योति ने कहा कि अजय निषाद खुद निषाद होकर निषाद आरक्षण का विरोध कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उनको तो मुकेश सहनी के साथ आकर निषाद समाज को आरक्षण दिलाने की लड़ाई लड़नी चाहिए। देवज्‍योति ने कहा कि अजय निषाद अपने पिता जय नारायण निशाद के बलबूते राजनीति कर रहे हैं। जबकि, मुकेश सहनी का राजनीति में कोई गाड-फादर नही है। निषाद समाज के समर्थन और विश्वास ने उन्हें निषाद समाज का सबसे बड़ा नेता बनाया है। बिहार ही नही, पूरा देश आज उन्हे ‘सन आफ मल्लाह’ के नाम से जानता है। अजय निषाद इससे बौखला गए हैं कि वे खुद निषाद होकर निषाद समाज के दिल में जगह नहीं बना पाए।

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