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रायपुर में लाखों का सुरक्षा चक्र कुत्तों के आतंक के आगे ध्वस्त

रायपुर । छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम प्रश्ाासन ने 12 लाख रुपये का बजट कुत्तों की समस्या के निवारण के लिए रखा है, लेकिन इसके बावजूद लगातार आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसका खमियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आंबेडकर अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक रोजाना औसतन डाग बाइट के 20 से 25 मामले सामने आ रहे हैं। इसमें भी आवारा कुत्ते सबसे ज्यादा अपना शिकार छोटे बच्चों को बना रहे हैं। इससे राजधानी में दिनोंदिन कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है।

आवारा कुत्ते आए दिन राजधानीवासियों को अपना शिकार बना रहे हैं। आवारा कुत्ते सुबह शाम निकलने वाले बच्चे, बड़े-बूढ़े और महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। इसके अलावा दोपहिया वाहन पर घूमने वाले लोग भी कुत्तों का शिकार होते हैं। कई बार ऐसे वाहन चालक कुत्तों की वजह से हादसे का शिकार होते हैं, जबकि नगर निगम शहर में आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण करने के लिए बधियाकरण किया जा रहा है। बधियाकरण पर हर साल निगम लाखों रुपये फूंक रहा है। उसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। निगम का दावा है कि पिछले एक साल में 5,129 आवारा कुत्तों का बधियाकरण किया गया है।

सुबह और शाम कुत्ते सड़क के बीचोंबीच झुंड में खड़े रहते हैं। इससे लोगों को रास्ता बदल कर निकलना पड़ता है। डंगनियां के लोगों का कहना है कि कुत्तों का डर इतना अधिक है कि अब बच्चे शाम को सड़क पर साइकिल चलाने नहीं निकल पाते हैं। कई बार निगम को शिकायत भी की गई। शिकायत के बाद निगम की टीम पकड़कर ले जाती है, लेकिन इनकी संख्या कम नहीं हो रही है।

बधियाकरण पर निगम ने जारी किया टेंड

कुत्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए निगम ने कुत्तों के बधियाकरण को लेकर 12 लाख रुपये का टेंडर वर्ष 2021 में जारी किया था। वर्ष 2022 के लिए निगम ने पिछले साल की तुलना में इस साल 15 प्रतिशत अधिक राशि का टेंडर जारी किया है।

बैजनाथपारा स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल में पशु चिकित्सक डा. एसके दीवान, डा. पवन शाहनी सेवाएं दे रहे हैं। बधियाकरण इनके ही जिम्मे है। निगम का दावा है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर दो दिन तक अस्पताल में रखते है, और फिर नसबंदी करने के बाद उनको उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है जहां से उनको ले जाते हैं।

प्रत्येक जोन में तीन से चाह हजार कुत्ते

राजधानी रायपुर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से यहाँ की जनता में इन आवारा कुत्तों द्वारा हमले की आशंका बढ़ गई है। राजधानी के प्रत्येक जोन में लगभग 3-4 हजार कुत्ते हैं यानी पूरे रायपुर शहर में करीब 40 हजार आवारा कुत्ते हैं। आवारा कुत्तों पर नकेल कसने के लिए नाम मात्र का एक दिन में सिर्फ 10-12 बधियाकरण किया जा रहा है, जो नाकाफी है।

जानिए क्या कहना है राजधानीवासियों का

केस 1

– आमापारा निवासी सोनू जायसवाल ने बताया कि आवारा कुत्ते सुबह-शाम सड़कों पर एक झुंड में बैठे रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले राहगीरों को अपना शिकार बनाते हैं। कुत्ते इस कदर लोगों को खदेड़ते हैं कि लोग भागकर किसी तरह अपनी जान बचाते हैं। आवारा कुत्ते दिन ब दिन खतरनाक होते जा रहे हैं।

केस 2

– मंगलबाजार निवासी विजय सोनी ने बताया कि बाजार में आवारा कुत्तों का आतंक हैं। आवारा कुत्तों को पकड़न के लिए निगम को अभियान चलाया जाना चाहिए। आवारा कुत्तों की डर से बच्चे अपने घर के बाहर नहीं निकलते हैं। इन्हें भगाने का कई बार प्रयास किया गया है, लेकिन लौट आते हैं। लोगों ने मांग की है कि नगर निगम इस समस्या का समाधान करे।

डाग बाइट के मामले रोज

शहर में इन दिनों डाग बाइट के मामले रोज आ रहे हैं। मरीजों को रेबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है। – डा. आरएल खरे, मेडिसिन विभाग, आंबेडकर अस्पताल रायपुर

महापौर के साथ बैठक

आवारा कुत्तों को लेकर प्लान बनाया जा रहा है। कार्य योजना को लेकर महापौर के साथ बैठक हुई है। जल्द ही कुत्तों की धर पकड़कर तेज की जाएगी। -प्रभात मलिक, आयुक्त, नगर निगम, रायपुर

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