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मध्यप्रदेश

नहीं हैं दोनों हाथ, MP प्रशासन ने ‘दंगाई’ बताकर दुकान पर बुलडोज़र चढ़ा दिया

खरगोन मध्य प्रदेश में राम नवमी के दिन भड़की हिंसा के बाद प्रशासन सख़्त कार्रवाई कर रहा है। प्रदर्शनकारियों, पत्थरबाज़ों और असामाजिक तत्वों के ख़िलाफ़ कोई नर्मी न बरतने का आदेश, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही दे चुके हैं। अवैध ज़मीन पर बने घरों, दुकानों पर बिना देर किए बुलडोज़र चलाया जा रहा है।अवैध ज़मीन पर बने घरों, दुकानों पर प्रशासन का बुलडोज़र चल रहा है। राज्य सरकार ने कार्रवाई के तहत 35 वर्षीय वसीम शेख की भी दुकान गिरा दी। ग़ौरतलब है कि जिस वसीम पर ‘पत्थरबाज़ी’ का आरोप लगाया गया है उसके कोहनी तक दोनों हाथ नहीं है। ‘उन्होंने मेरी दुकान तोड़ दी, मैं छोटा-मोटा धंधा करता था। मैं 5 सदस्यों को पालने के लिए कैंडी बेचता था।’ वसीम शेख एक पेंटर थे लेकिन 2005 में काम के दौरान के दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए।

शेख ने कहा, ‘सरकार कह रही है कि हिंसा में शामिल लोगों के घर, दुकानें तोड़ी जा रही हैं। मैं हिंसा में कैसे हिस्सा ले सकता हूं? मैं तो एक ग्लास पानी के लिए भी दूसरों पर निर्भर हूं। मेरे पास अपने दोनों बच्चों, पत्नी और मां को खिलाने का कोई ज़रिया नहीं है।’ शेख का कहना है कि उनकी दुकान गैरकानूनी ढंग से बनी है, ऐसा कोई नोटिस सरकार से नहीं मिला। खरगोन ज़िलाधिकारी पी अनुग्रह ने इन इल्ज़ामों को बेबुनियाद बताया है। अनुग्रह के शब्दों में, ‘हमने वसीम की कोई दुकान नहीं गिराई।’ 11 अप्रैल को हुई हिंसा में 20 से ज़्यादा लोग घायल हुए। खरगोन हिंसा से जुड़े होने के इल्ज़ाम में अब तक 44 केस दर्ज हो चुके हैं और 148 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।

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