ब्रेकिंग
Singrauli: प्रेमिका की शादी कहीं और तय हुई तो 100 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ा प्रेमी, 4 घंटे तक चला 'शोले'... Chhindwara Fire: छिंदवाड़ा की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, 1 किमी दूर से दिखे धुएं के गुबार; 11 दमकलें... Satna News: हाईकोर्ट से जमानत मिली पर घरवाले नहीं ले जाना चाहते साथ; सतना जेल में अपनों की राह देख र... जबलपुर पहुंचे CM मोहन यादव का बड़ा दावा: 'अगर सुभाष चंद्र बोस के हाथ में होती कांग्रेस की कमान, तो क... Gwalior News: ग्वालियर में 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का पर्दाफाश; मानसिक रूप से कमजोर युवक से शादी कर 2 ल... Mandala Crime: शादीशुदा प्रेमिका के घर पिस्टल लेकर घुसा सनकी आशिक, दुष्कर्म के बाद पुलिस की गाड़ी को... टी20 वर्ल्ड कप से पहले खतरे की घंटी! नागपुर में जीत के बाद भी क्यों डरे हुए हैं भारतीय फैंस? फील्डिं... Gaza Peace Deal: हमास छोड़ेगा हथियार और लड़ेगा चुनाव! अमेरिका के साथ हुई ऐतिहासिक डील, फिलिस्तीन की ...
मध्यप्रदेश

भोपाल संस्‍कृति बचाओ मंच के अध्‍यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का दावा, मंदिर तोड़कर किया गया था जामा मस्जिद का निर्माण

भोपाल ।    यूपी के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्‍जिद को लेकर उठा विवाद दूसरे प्रदेशों में भी पहुंचने लगा है। राजधानी भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच नामक संगठन ने पुराने शहर के चौक में स्‍थित जामा मस्‍जिद का पुरातत्‍व सर्वेक्षण की मांग छेड़ दी है। संस्‍कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस आशय की मांग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से की है। तिवारी ने कहा कि भोपाल की जामा मस्जिद दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह बाग पद्धति पर आधारित है। मजिस्द का इतिहास पुराना है। भोपाल रियासत की आठवीं शासिका सुल्तान जहां बेगम ने अपनी किताब हयाते कुदसी में जिक्र किया है पहले इसे हिन्दुओं का पुराना मंदिर से जाना जाता था। मंदिर का पुरात्तव सर्वेक्षण कराने की मांग मुख्यमंत्री व गृहमंत्री से की है। अदालत में भी याचिका लगाएंगे। चंद्रशेखर तिवारी का दावा है कि मंदिर तोड़कर जामा मस्जिद मनाई गई है। पुरातत्व विभाग सर्वे करे तो सब दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। जिस तरह उत्तर प्रदेश की ज्ञानवापी मस्जिद में भगवान शिवजी का शिवलिंग मिला है। उसी तरह पुराने शहर के चौक बाजार की जामा मजिस्द में मूर्तियां मिलेंगी। जामा मस्जिद का निर्माण 1857 में हुआ था। पुराना मंदिर तोड़ कर मजिस्द बनाई गई थी। उस समय इसकी लागत पांच लाख रुपये आई थी। नौ मीटर वर्गाकार ऊंची जगह पर निर्मित इस मस्जिद के चारों कोनों पर हुरे बने हुए हैं। इसमें तीन दिशाओं से प्रवेश द्वार हैं। भीतर एक आंगन है। पूर्वी और उत्तरी द्वार के बीच हौज स्तंभों पर आधारित है। स्तंभों की संरचना इस तरह की है, जो भवन स्वत दो समानंतर भागों में बंटी हैं पांच मंजिला इमारत में मीनारें हैं।चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि उन्होंने जामा मस्जिद जाकर देखा है। मंदिर के अवशेष मिलते हैं। यदि पुरातत्‍व के अधिकारियों व कर्मचारियों ने सर्वे किया तो इस बात की सौ प्रतिशत संभावना है कि मस्जिद में भगवान शिवजी की मूर्ति निकलने के साथ-साथ ऐसे अवशेष निकलेंगे, जो मंदिर होने का प्रमाण देंगे। सरकार को सर्वे कराकर मस्जिद को हिन्दू समाज को सौंप देना चाहिए।

Related Articles

Back to top button