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GSP हटने से US को हो रहा नुकसान, 44 अमेरिकी सांसदों ने भारत के लिए ट्रंप को लिखा पत्र

वॉशिंगटनः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विश्व पटल पर साख बढ़ी है। पूरी दुनिया के देश PM मोदी की राजनीतिक व कूटनीतिक नीतियों के कायल हो गए हैं और भारत के साथ संबंधों को मजबूत बनाना चाहते हैं। मोदी के नेतृत्व में ही अमेरिका और भारत के बीच दोस्ती के नए आयाम जुड़़े यही वजह कि अमेरिका के 44 सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खत लिखकर कहा है कि भारत को फिर से GSP कार्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते आसानी से हो सकें।

GSP हटाने का अमेरिका को हो रहा नुकसान
सांसदों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर को लिखे पत्र में कहा है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें अपने उद्योगों के लिए बाजारों की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी। कुछ छोटे मुद्दों की वजह से इस पर असर नहीं पड़ना चाहिए। कांग्रेस (संसद) सदस्य जिम हाइम्स और रॉन एस्टेस की तरफ से लिखे पत्र में 26 डेमोक्रेट्स और 18 रिपब्लिकन सासंदों ने हस्ताक्षर किए हैं। कोलिशन फॉर GSP के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डैन एंथनी का कहना है कि भारत से GSP दर्जा छीने जाने के बाद से ही अमेरिकी कंपनियां संसद को नौकरियों और आमदनी के नुकसान के बारे में बता रही हैं।  एंथनी के अनुसार, भारतीय निर्यातकों की हालत GSP हटने के बाद भी बेहतर है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को प्रतिदिन दस लाख डॉलर (सात करोड़ रुपए) नए टैरिफ के तौर पर चुकाने पड़ रहे हैं। नए आंकड़ों के अनुसार, अकेले जुलाई में ही अमेरिकी कंपनियों को तीन करोड़ डॉलर (214 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है।

अमेरिका का GSP कार्यक्रम क्या है ?
अभी तक भारत GSP के तहत सबसे बड़ा लाभार्थी देश माना जाता था, लेकिन ट्रंप प्रशासन की यह कार्रवाई नई दिल्ली के साथ उसके व्यापार संबंधी मुद्दों पर सख्त रवैये को दिखा रही है। GSP को विभिन्न देशों से आने वाले हजारों उत्पादों को शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। बता दें कि साल 2017 में GSP के तहत भारत ने अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर से अधिक का कर-मुक्त निर्यात किया था।

भारत को इस सूची से बाहर करने की वजह
ट्रंप ने भारत को सूची से बाहर करते हुए कहा था कि उन्हें भारत से यह भरोसा नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। उन्होंने कहा था कि भारत में पाबंदियों की वजह से अमेरिका को व्यापारिक नुकसान हो रहा है। भारत GSP के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है। अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में GSP के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी जिसके बाद ये फैसला किया गया था।  माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दौरे के समय GSP पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा कर सकते हैं। ऐसे में संभावना है कि दोनों नेता इस दौरान लंबे समय से विवाद का कारण बने व्यापारिक मुद्दों पर समझौते भी करेंगे

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