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मध्यप्रदेश

मौत के 65 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने किया नर्स का तबादला

शिवपुरी ।    शिवपुरी स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार की शाम नर्सिंग स्टाफ के स्थानांतरण की सूची जारी की है। इस सूची में शिवपुरी की एक ऐसी नर्स का नाम शामिल है जिसकी मौत 65 दिन पहले हो चुकी है। जब वह नर्स जिंदा थी तो घर से दूर रहने और बहुत अधिक काम के चलते डिप्रेशन का शिकार हो गई। डिप्रेशन इतना की नींद की गोलियों का ओवरडोज ले लिया और उसका शव कमरे में मिला। विभागीय सूत्रों की मानें जब नर्स जिंदा थी तो उसने अपने तबादले के लिए भरसक प्रयास किए। वह अपने घर बैतूल से करीब 500 किमी दूर आकर नौकरी कर रही थी। जीते जी उसका ट्रांसफर हो जाता तो शायद उसे तनाव से राहत मिल सकती थी। खैर, अब विभाग ने उसकी मौत के 65 दिन बाद उसका तबादला कर दिया है। उल्लेखनीय है कि बैतूल निवासी 28 वर्षीय तन्वी दबंडे शिवपुरी में बतौर नर्सिंग स्टाफ पदस्थ थी। वह डिप्रेशन का शिकार हो चुकी थी। ऐसे में भोपाल के किसी डाक्टर से वह अपना इलाज करवा रही थी। यही कारण था कि वह चाहती थी कि उसका स्थानांतरण उसके घर के आसपास या भोपाल हो जाए ताकि वह अपना उपचार ठीक से करा सके और अपने स्वजनों की सहायता से डिप्रेशन से बाहर निकल सके। वह अपने स्थानांतरण के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही थी। यहां तक कि उसने खुद के व्यय पर स्थानांतरण करने के लिए आवेदन भी किए, लेकिन उसका स्थानांतरण नहीं हो सका। दिसंबर माह में जब संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की तो खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ रहते हुए उसे लगातार ड्यूटी करनी पड़ी। 20 दिसंबर को अपने सरकारी आवास में अत्यधिक नींद की गोलियों का सेवन कर लिया जिससे उसकी मौत हो गई थी। मौत के समय चुप्पी, अब स्थानांतरण उस वक्त तन्वी की मौत पर किसी ने कुछ नहीं बोला, स्वास्थ्य विभाग के लोग इसे नींद की गोलियां खाकर अज्ञात कारणों के चलते आत्महत्या से जोड़ कर देख रहे थे।

सातवें नंबर पर है नाम

23 फरवरी की शाम स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग स्टाफ के स्थानांतरण की सूची में सातवे नंबर पर तन्वी दबंडे का नाम अंकित है। सूची के अनुसार उसका स्थानांतरण जिला चिकित्सालय रायसेन पदस्थ किया गया है। उसके साथ काम कर चुकी एक नर्स ने नाम और पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि वह कई बार कहती थी कि वह यहां काफी अकेला महसूस करती है, काफी परेशान रहती है। वह चाहती है कि कैसे भी उसका ट्रांसफर घर या घर के आसपास किसी जिले में हो जाए तो परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। नर्स के अनुसार वह खुद के स्थानांतरण के लिए लंबे समय से प्रयास कर रही थी। दो महीने के बाद भी पुलिस की जांच जस की तस इस मामले में पुलिस की जांच भी अभी आगे नहीं बढ़ सकी है। उस समय पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया था, लेकिन मौत के असल कारण तक अभी पुलिस भी नहीं पहुंची है। खोड़ चौकी प्रभारी अंशुल गुप्ता के अनुसार अभी इस मामले की जांच चल रही है। मृतका के स्वजन बयान देने के लिए आना चाहते हैं। हम उनके साथ संपर्क में हैं। एक बार जांच पूरी हो जाए उसके बाद ही कुछ स्पष्ट किया जा सकेगा।

मृत्यु की सूचना भेज दी थी भोपाल

हमारे यहां से मृत्यु के संबंध में जानकारी भोपाल भेज दी गई थी। अब आदेश भोपाल से जारी हुए हैं तो कुछ कह नहीं सकता हूं। अभी सूची भी नहीं देखी है।

– डा. पवन जैन, सीएमएचओ

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