ब्रेकिंग
Swami Avimukteshwaranand on Gen Z: सादगी और मासूमियत ने दिला दिया मंत्री से इस्तीफा, मुख्य चुनाव आयु... Dewas Naka Flyover Indore: जाम से मिलेगी राहत, दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 तक शुरू होने की संभावना MP Shujalpur Incident: चौबे मार्ग पर डीजे के कंपन से गिरा पैतृक मकान का हिस्सा, शांति समिति के नियमो... Bhojshala Satyagrah Dhar: संत समाज हिंदू आस्था के इस केंद्र के लिए पूरी तरह समर्पित, मां सरस्वती की ... UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR चार्ज का विरोध: 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाने की तैयारी में मोबाइल रिटे... Shahdol News: बिजली कटने से नाराज युवक शराब के नशे में ट्रांसफॉर्मर पर चढ़ा, सब-स्टेशन में मचाया जमक... Bilaspur News: मस्तूरी के स्कूल में बड़ा हंगामा, लेक्चरर ने प्रिंसिपल से की गाली-गलौज और जान से मारन... Ujjain Simhastha 2028: विकास कार्यों के लिए सीएम मोहन यादव ने खुद तोड़ा अपना पैतृक मकान, कहा- जनहित ... Ganesh Visarjan Accident Bhind: भारी बारिश के बीच नदी में फिसले पैर, एनडीआरएफ की टीम भी अब तक नहीं ढ... MPPSC Success Story: असफलता से हार नहीं मानी, 5 बार नेट क्वालीफाई कर राजीव कुशवाहा ने हासिल किया मुक...
मध्यप्रदेश

देश के उज्जवल भविष्य के लिए महिलाओं का राजनीति में आना जरूरी -देशमुख

इंदौर। यदि संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण नहीं किया गया होता तो क्या उस वर्ग को उतना प्रतिनिधित्व मिल पाता जितना कि वर्तमान में मिल रहा है। पिछले 10 वर्षों में महिलाएं चुनाव के मतदान में पुरुषों के बराबरी पर आ गई हैं और मेरा भरोसा है कि 2024 के चुनाव में वे पुरुषों से ज्यादा मतदान करेंगी।

यह बात चुनाव विश्लेषक यशवंत देशमुख ने मंगलवार शाम इंदौर में कही। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी ज्यादा है तो उन्हें बराबरी से चुनाव में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। टीवी पर बहस में हम 90 प्रतिशत समय जातिगत समीकरण और धर्म के ध्रुवीकरण को देते हैं। महिलाओं के मतदान के मुद्दे अलग होते हैं। महिलाएं हमेशा उन्हें मिलने वाली सहायता, जीविका, सुरक्षा, रोजगार, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर मतदान करती हैं।

समझदार मतदाता हैं महिलाएं

जाल सभागृह में अभ्यास मंडल की 62वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला के दौरान देशमुख ने महिला आरक्षण और चुनौतियां विषय पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी यही स्थिति नजर आई है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं ने बुलडोजर बाबा को वोट नहीं दिया। उन्होंने राशन और शौचालय को वोट दिया। महिलाओं के मतदान के मुद्दों को देखकर हम यह समझ सकते हैं कि समझदार मतदाता कौन है।

श्रेष्ठ दस देशों की विधायिका में महिलाएं ज्यादा

वर्तमान में हमारे देश में किसी भी पार्टी का एक भी नेता अपने वार्ड का चुनाव भी अपने दम पर नहीं जीत सकता है। भाजपा पंचायत से लेकर लोकसभा तक मोदी के चेहरे को सामने रखकर जीत रही है, तो फिर महिलाएं क्यों नहीं जीत सकती है। महिलाओं के राजनीति में आने से ही देश का भविष्य उज्जवल है। इस समय विश्व में सबसे खुशहाल और सबसे बेहतर रहने लायक देशों की सूची में जो श्रेष्ठ दस देश हैं, वहां विधायिका में महिलाएं ज्यादा हैं। इस दौरान अतिथियों का स्वागत मंजू व्यास, संजय गोदारा और कीर्ति राणा ने किया। कार्यक्रम का संचालन वैशाली खरे ने किया। अतिथि को स्मृति चिह्न पद्मश्री भालू मोंढ़े ने दिया। आभार अशोक जायसवाल ने माना।

Mp

Related Articles

Back to top button