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धार्मिक

कुंडली में सूर्य को मजबूत करना है तो 9 जुलाई को जरूर करें भानु सप्तमी व्रत

 हिंदू पंचांग के मुताबिक हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी को भानु सप्तमी व्रत रखा जाता है। इस व्रत का विशेष पौराणिक महत्व बताया गया है। सावन माह में इस बार कृष्ण पक्ष की भानु सप्तमी 9 जुलाई को मनाई जाएगी। भानु सप्तमी को रथ सप्तमी भी कहा जाता है।

सूर्य देव की होती है उपासना

रथ सप्तमी या भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। पौराणिक मान्यता है कि भानु सप्तमी तिथि पर सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति को जीवन में यदि कोई मानसिक और शारीरिक कष्ट है तो उससे मुक्ति मिलती है। इसके अलावा जिन जातकों की लग्न कुंडली में सूर्य कमजोर होता है तो भानु सप्तमी व्रत करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है।

रथ सप्तमी व्रत का धार्मिक महत्व

रथ सप्तमी को सूर्य सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, भानु सप्तमी और आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं। इस व्रत को करने से कुंडली में जब सूर्य मजबूत होता है तो करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही आय, आयु, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। मनचाही नौकरी भी प्राप्त होती है।

ऐसे करें भानु सप्तमी पर पूजा

– 9 जुलाई को ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।

– सूर्योदय के साथ ही सूर्य देव को प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें।

– बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित करें।

– जल में चावल, काले तिल, रोली और दूर्वा मिलाकर सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें।

– सूर्य देव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करें –

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।

अनुकम्पय मां देवी गृहाणा‌र्घ्यं दिवाकर।।

ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं

भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

सूर्य चालीसा का भी करें पाठ

पंचोपचार करने के बाद सूर्य देव की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, अक्षत, दूर्वा आदि से करें। आखिर में सूर्य चालीसा और सूर्य कवच का पाठ करें। सूर्य देव की आरती-अर्चना के बाद पूजा का समापन करें और गरीब व जरूरतमंदों को दान दें।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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