ब्रेकिंग
Tamil Nadu Government Jobs: टीवीनके सरकार का बड़ा फैसला, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऊपरी आयु सीमा मे... Rajasthan Education News: मदन दिलावर के फरमान से सरकारी टीचर्स की बढ़ी मुश्किलें, बिना बजट दीपावली प... UP PCS Transfer News: पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी मामले के बाद दो SDM समेत 11 पीसीएस अधिकारियों क... Mumbai Model Honey Trap Case: मशहूर मॉडल पर कारोबारी को हनी ट्रैप में फंसाकर 1.39 करोड़ रुपये वसूलने... Lucknow Murder Case: RSS कार्यकर्ता समेत परिवार के 3 सदस्यों की हत्या पर गरमाई सियासत, DGP और ACS हो... Lucknow Terror Plot Busted: यूपी एटीएस ने पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर रची जा रही टारगेट किलिंग की ... Chamoli Helicopter Crash: बदरीनाथ से लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट समेत 6 लो... Hisar Murder News: HAU लेबर कॉलोनी में 20 वर्षीय युवक की बेरहमी से हत्या, सिर पर ईंट-रॉड से वार कर उ... Haryana Crime News: कुरुक्षेत्र फायरिंग कांड में पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग, मुख्य आरोपी रिमांड पर औ... Ballabgarh News: बल्लभगढ़ की गली में दो सांडों की खौफनाक लड़ाई का वीडियो वायरल, जान बचाने के लिए घरो...
मध्यप्रदेश

जिन धाराओं का आधार नहीं इंदौर पुलिस ने उनमें भी कर दी कायमी, कोर्ट ने फटकारा

इंदौर। कनाड़िया पुलिस थाने में दर्ज एक प्रकरण में पुलिस की गंभीर चूक सामने आई है। मामले को गंभीर बताने के चक्कर में पुलिस ने प्रकरण में वे धाराएं भी लगा दीं, जिनका कोई आधार ही नहीं था। जिला न्यायालय ने इस पर गंभीर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की कि ऐसी धाराओं को लेकर विचारण न सिर्फ निरर्थक है, अपितु न्यायालय के मूल्यवान समय का अपव्यय भी है। बेहतर होगा कि इन धाराओं को विचारण से पहले ही हटा लिया जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने ब्लैकमेलिंग का आरोप भी लगाया है।

कनाड़िया थाना पुलिस ने करीब दो वर्ष पहले राजीव अग्निहोत्री की शिकायत पर अशोक जैन नामक व्यवसायी के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 201 में प्रकरण दर्ज किया था। आरोप था कि जैन ने अग्निहोत्री की संपत्ति हड़पने की नीयत से फर्जी अनुबंध बनाया और भुगतान भी नहीं किया।

प्रकरण में कई तथ्य छुपाए गए

पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए जैन ने जिला न्यायालय में याचिका दायर की। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विनय सराफ ने कोर्ट को बताया कि मामला फर्जी दस्तावेज का नहीं, अपतिु जमीन की कीमत बढ़ने का है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने 37 पेज के फैसले में माना कि शिकायतकर्ता ने प्रकरण में कई तथ्य छुपाए हैं। पुलिस ने उन धाराओं में प्रकरण दर्ज किया, जिनमें प्रकरण दर्ज करने का कोई आधार ही नहीं था।

कोर्ट ने मात्र एक धारा को विचारण में रखा

फर्जी अनुबंध की एफएसएल की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जिस दस्तावेज को जैन का बताते हुए प्रकरण दर्ज किया गया था, वह शिकायतकर्ता के ही थे। बावजूद इसके कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धारा लगाई गई। न्यायालय ने प्रकरण में मात्र धारा 420 में विचारण को यथावत रखा है।

Related Articles

Back to top button