MP High Court Decision on Gram Rojgar Sahayak: मध्य प्रदेश के रोजगार सहायकों के ट्रांसफर और भत्तों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को दिए ये निर्देश

जबलपुर: मध्य प्रदेश के भीतर लगभग 23 हजार ग्राम पंचायतों में अपनी सेवाएं दे रहे ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) के संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय पारित किया है। प्रदेश सरकार की ओर से ग्राम रोजगार सहायकों के कार्य दायित्वों और सेवा शर्तों को लेकर पूर्व में जारी की गई मार्गदर्शिका (गाइडलाइंस) को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया है। इस न्यायिक आदेश के तहत हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में किसी भी ग्राम रोजगार सहायक का स्थानांतरण (ट्रांसफर) किया जाता है, तो राज्य शासन को उन्हें नियमानुसार ट्रांसफर अलाउंस (स्थानांतरण भत्ता), डेली अलाउंस (दैनिक भत्ता) और हाउस रेंट अलाउंस (मकान किराया भत्ता) जैसी सभी आवश्यक वित्तीय सुविधाएं प्रदान करनी होंगी।
वर्ष 2025 में सरकार द्वारा बदले गए थे नियम, पांच संगठनों ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
राज्य सरकार की ओर से गत 24 जून 2025 को एक नई मार्गदर्शिका लाई गई थी, जिसमें ग्राम रोजगार सहायकों के ट्रांसफर का प्रावधान जोड़ा गया था। गौरतलब है कि जब इन रोजगार सहायकों की नियुक्ति की गई थी, तो उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताया गया था कि वे केवल अपनी मूल ग्राम पंचायत तक ही सीमित रहकर कार्य करेंगे और उनका तबादला अन्य ग्राम पंचायतों में नहीं किया जा सकेगा। परंतु, वर्ष 2025 में सरकार द्वारा इस नियम में संशोधन किए जाने के विरोध में प्रदेशभर के रोजगार सहायकों से जुड़े पांच प्रमुख संगठनों ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएं दायर कर दी थीं। याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती चरण में न्यायालय ने इस मामले में रोजगार सहायकों के पक्ष में स्थगन आदेश (स्टे) प्रदान किया था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है और अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन ही अब रोजगार सहायकों के तबादले किए जा सकेंगे।
स्थानांतरण की स्थिति में छह महीने के भीतर नई पॉलिसी बनाने के निर्देश
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने पक्ष रखते हुए न्यायालय को बताया कि सरकार द्वारा ग्राम रोजगार सहायकों के लिए स्थानांतरण की व्यवस्था तो लागू कर दी गई थी, लेकिन ट्रांसफर की स्थिति में कर्मचारियों को मिलने वाली आर्थिक सुविधाओं और भत्तों का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए अब हाईकोर्ट ने यह कड़ा निर्देश जारी किया है कि राज्य सरकार अगले छह महीनों के भीतर एक व्यापक नीति (पॉलिसी) तैयार करे। इसके तहत यदि किसी ग्राम रोजगार सहायक का अन्यत्र तबादला होता है, तो सरकार को उन्हें नियमानुसार ट्रांसफर अलाउंस, डेली अलाउंस और मकान किराया भत्ता देना ही होगा।
बर्खास्तगी, बहाली और अपील के प्रावधानों को लेकर भी अदालत ने दी राहत
अधिवक्ता गोपेश तिवारी के अनुसार, इस मार्गदर्शिका में यह भी व्यवस्था निर्धारित की गई है कि यदि किसी ग्राम रोजगार सहायक पर वित्तीय अनियमितता या गबन जैसे गंभीर आरोप लगते हैं, तो उनके विरुद्ध बर्खास्तगी की अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। हालांकि, यदि वे संबंधित अदालत या जांच में निर्दोष साबित हो जाते हैं, तो केवल एक सामान्य आवेदन प्रस्तुत करने पर उन्हें पुनः उनकी नौकरी में बहाल किया जाना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, अपनी किसी भी अपील या शिकायत को दर्ज कराने के लिए रोजगार सहायकों को अब बार-बार भोपाल के चक्कर काटने की कोई अनिवार्यता नहीं रहेगी। वे डाक या पत्राचार के माध्यम से भी अपनी अपील उच्चाधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे, जिसके लिए मनरेगा कमिश्नर के समक्ष अपील करने का विशेष प्रावधान रखा गया है।





