ब्रेकिंग
नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर कैलाश विजयवर्गीय की दो टूक, कहा- आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीतेंग... दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर भाजपा में घमासान, समर्थकों का प्रदर्शन और पथराव MP Crime News: लवकुशनगर में 8वीं के छात्र के साथ कुकर्म, आरोपी सरकारी कर्मचारी सलाखों के पीछे मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर चढ़कर युवक ने कोतवाल को दी वर्दी उतरवाने की धमकी, वीडियो व... IND vs ENG: साउथैम्प्टन में टीम इंडिया की साख दांव पर, क्या नंबर 1 का ताज बचा पाएंगे रोहित? टीवी एक्टर रोहित चंदेल गिरफ्तार: नाबालिग का पीछा करने और मारपीट के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई स्पेन में जंगल की आग का तांडव: 12 लोगों की मौत, 23 लापता; यूरोप में भीषण गर्मी का कहर Sony RX10 V लॉन्च: 25x ऑप्टिकल ज़ूम और AI फीचर्स वाला दमदार कैमरा, जानें कीमत और खूबियां Shani Dev Puja: शनिवार को न करें ये काम, वरना झेलना पड़ सकता है शनिदेव का प्रकोप! झड़ते बालों से हैं परेशान? जिंक की कमी के लक्षणों को पहचानें और डाइट में शामिल करें ये चीजें
देश

चुनाव के बाद का सर्वेक्षण: जब योजनाएं हुईं वोटों में तबदील

नई दिल्ली: 2019 के लोकसभा चुनाव में न केवल सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों (724) ने चुनाव लड़ा, बल्कि सबसे ज्यादा महिलाएं(78) इस चुनाव में विजेता भी रही हैं। भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार पुरुषों और महिलाओं के लिए मतदान क्रमश: लगभग बराबर था-66.79 प्रतिशत और 66.68 प्रतिशत।

PunjabKesari

लिंग अनुपात नुक्सान
पिछले राष्ट्रीय चुनाव अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं से कम समर्थन मिला था। इन चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बावजूद पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर महिला मतदाताओं के बीच 3 प्रतिशत का लिंग अंतर नुकसान हुआ है। कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो पारम्परिक रूप से महिलाओं की पक्षधर है। पुरुषों और महिलाओं के समान प्रतिशत का कम या ज्यादा समर्थन करती थी और यहां बसपा और उसकी सहयोगी और वाम दलों को कम समर्थन मिला है। भाजपा के लिए लिंग अंतर नुक्सान पूरे देश में एक समान नहीं। ङ्क्षहदी भाषी राज्यों मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी के लिए सबसे अधिक लिंग अंतर नुक्सान देखा गया। जहां पुरुषों और महिलाओं के बीच मतदान अंतर क्रमश: 7 और 5 प्रतिशत था। हालांकि, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और हरियाणा में पार्टी ने अधिक महिलाओं को मतदान करते देखा। हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए मतदान करने वाली महिलाओं और पुरुषों की संख्या समान थी।

PunjabKesari

सामाजिक प्रोफाइल
उच्च जातियों, मुसलमानों और आदिवासियों को छोड़कर सभी सामाजिक समूहों में महिलाओं के बीच कांग्रेस का आधार कमोबेश संतुलित था। दूसरी ओर भाजपा को युवा महिला मतदाताओं के साथ-साथ उच्च जाति, शिक्षित और समृद्ध महिला मतदाताओं का अधिक समर्थन प्राप्त है। अधिकांश सामाजिक समूहों के अलावा एक ही समूह की महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने भाजपा को ज्यादा वोट दिया। कांग्रेस के मतदाताओं के साथ ऐसा नहीं था, जहां विभिन्न सामाजिक समूहों में पार्टी के लिए लिंग आधारित समर्थन अधिक संतुलित था। पुरुषों का एक उच्च अनुपात भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) को महिलाओं की तुलना में एक और मौका देना चाहता था।

PunjabKesari

प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए 5 प्रतिशत अधिक थी। जहां 44 प्रतिशत महिलाओं ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखना पसंद किया, वहीं 49 प्रतिशत पुरुष उन्हें देश का नेतृत्व देना चाहते थे।हालांकि भाजपा के लिए समग्र लिंग अंतर नुक्सान जारी है (यानी पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच कम समर्थन)। 2014 की तुलना में यह नुक्सान कम है। इसके बाद 29 प्रतिशत महिलाओं ने पार्टी का विकल्प चुना था। इस चुनाव में यह बढ़कर 36 प्रतिशत हो गया। पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच की खाई जिन्होंने भाजपा को वोट दिया है 2014 में 4 प्रतिशत के अंक से 2019 में 3 प्रतिशत अंक की मामूली गिरावट देखी गई है। हम यह भी देखते हैं कि 2019 में अधिकतर महिलाएं (पुरुषों के साथ) कांग्रेस से भाजपा में स्थानांतरित हो गई हैं। 2014 के चुनाव के बाद से महिला मतदाताओं के बीच प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में काफी वृद्धि इस बदलाव को प्रभावित कर सकती है।

PunjabKesari

योजनाओं से लाभान्वित
एक और कारण मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का परिणाम हो सकता है। जब मतदाताओं को मोदी सरकार की एक नीति या कार्यक्रम का नाम देने के लिए कहा गया, जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आई, तो महिलाओं के लिए बनाई गई उज्ज्वला योजना सबसे लोकप्रिय थी। इसके बाद स्वच्छ भारत अभियान, जन-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का पालन किया गया। हमारे अध्ययन में पुरुषों और महिलाओं (34 प्रतिशत) के बराबर अनुपात ने उज्ज्वला योजना से लाभान्वित होने की सूचना दी। इस योजना के तहत महिला लाभार्थियों ने उन महिलाओं की तुलना में भाजपा को अधिक वोट दिया जिन्हें इसका लाभ नहीं मिला (क्रमश: 41 प्रतिशत और 33 प्रतिशत)। जन धन योजना के महिला लाभार्थियों में 34 प्रतिशत गैर-लाभार्थियों की तुलना में 42 प्रतिशत महिला लाभाॢथयों ने भाजपा को चुना। इस प्रकार इस तर्क में कुछ सामथ्र्य है कि अपने समग्र लैंगिक नुक्सान के बावजूद मोदी की लोकप्रियता में वृद्धि और उनकी सरकार की योजनाओं के प्रभाव के परिणामस्वरूप भाजपा इस बार पहले से ज्यादा महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में सक्षम नजर आई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button