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Kota Child Deaths: कांग्रेस सरकार मंत्री सतीश पूनियां ने कहा-आपसी झगड़े में राजस्थान की जनता का नुकसान ना करें

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने राजस्थान भर में अस्पताल में बच्चों की हो रहीं अकाल मौत के बाद मंत्रियों में आपस में छिडी बयानबाजी की जंग पर गहलोत सरकार को घेरते हुये कहा कि सरकार की गुड गर्वेनेस की पोल खुल गई है। उनके आपसी अंतरकलह खुल कर सामने आ गये है। इनकी इस प्रकार की सियासत से अराजकता फैल रहीं है। आपसी अंतरकलह के कारण राजस्थान की जनता का नुकसान हो रहा है। यह शब्द युद्ध बन्द होना चाहिये और राजस्थान की जनता के हित में काम होना चाहिये।

डाॅ. पूनियां ने राजस्थान में हुई बच्चों की मौत की तुलना गुजरात व तेलंगाना में हुई बच्चों की मौत से करने पर ऐतराज जताते हुये कहा कि बच्चों की मौत होना ही दुखदः घटना है, इसमें प्रतिस्पर्धा उचित नहीं है, आंकड़ों में उलझाकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, लेकिन सरकार अपने उपमुख्यमंत्री की दी हुई सलाह को ना मानकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड रहीं है।

डाॅ. पूनियां ने जेएनयू में हुई हिंसा में घायल हुये एबीवीपी कार्यकर्ताओं की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुये हिंसा पर सवाल उठाया और कहा कि यह हिंसा सुनियोजित लग रही है। इस मामले में माकप नेता, कांग्रेस और केजरीवाल सरकार की भूमिका और त्वरित प्रतिक्रिया संदेह के घेरे में है। हिंसा होना और हिंसा की घटना होते ही वामपंथी नेताओं और विपक्ष के प्रमुख नेताओं का वहां पर पहुंच जाना इस पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका पर सवाल उठाती है?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि सीएए का विरोध करने के लिये जेएनयू, जामिया, एएमयू जैसे विश्वविद्यालयों में नक्सलियों और वामपंथियों ने भरसक प्रयास किया जिसमें वह सफल नहीं हुये। उस असफल विरोध की झुंझलाहट जेएनयू में एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हमला करके निकाली।

सीएए के विरोध पर गहलोत सरकार को नसीहत देते हुये डाॅ. पूनियां ने कहा कि 47 साल से ज्यादा सत्ता में रहने के बाद भी स्कूल, सड़क, चिकित्सा में जो सुधार होना चाहिये था, वो आप नहीं कर पाये। विस्थापितों को नागरिकता देने की आप वादे ही करते रहे, वो भी आप नहीं कर पाये। यह काम हमने किया और अब आप इसका विरोध करने के लिये देश के टुकड़े करने की मंशा रखने वाले वामपंथियों, नक्सलियों, अलगाववादियों का समर्थन करने लगे है, जो किसी भी रूप में संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आये जनप्रतिनिधियों के लिये उचित नहीं है।

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