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संजय राउत बोले-शिवसेना की नैया डोले!

वरिष्ठ शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत तथा पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के परिवार के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। ठाकरे के परिवार को लगता है कि संजय राऊत अपने कद से ज्यादा ऊंचे हो गए हैं और उन्हें अनुशासित करना जरूरी है। कारण! जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक नहीं थे और आदित्य ठाकरे को युवा होने के कारण नजरअंदाज किया जा रहा था तो संजय राऊत इस पद के लिए इच्छुक थे लेकिन उद्धव ठाकरे की पत्नी और ससुर ने उन्हें मुख्यमंत्री का पद संभालने के लिए मना लिया।

इसके बाद उद्धव ठाकरे संजय राऊत के भाई सुनील राउत को सरकार में शामिल करना चाहते थे लेकिन परिवार के सदस्यों ने इस बात का विरोध किया और उनकी बात मानी गई। इस प्रकार दोनों खेमों में रार बढ़ती जा रही है और संजय राउत जानबूझ कर शिवसेना नेतृत्व को उलझन में डालने वाले काम कर रहे हैं तथा महाराष्ट्र में महाराष्ट्र विकास अगाड़ी सरकार की नैया पलटना चाहते हैं। शपथ ग्रहण समारोह में भी वह अनुपस्थित रहे।

खास बात यह भी है कि इस काम में कांग्रेस के पृथ्वी राज चव्हाण भी इनकी सहायता कर रहे हैं। चव्हाण उपमुख्यमंत्री बनना चाहते थे और उसके बाद वह महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर बनना चाहते थे लेकिन शरद पवार के विरोध के कारण वह इनमें से कोई भी पद हासिल नहीं कर पाए। फिर अचानक उन्होंने वीर सावरकर का मुद्दा उठाया जिस पर संजय राउत ने सावरकर को भारत रत्न देने की निंदा करने वालों के बारे में कहा कि जो लोग यह बात कह रहे हैं उन्हें कुछ समय अंडेमान की जेल में बिताना चाहिए लेकिन आदित्य ठाकरे ने खुले तौर पर यह कहते हुए राऊत को झिड़का, ‘‘हम विकास पर ध्यान केन्द्रित करना चाहते हैं, इतिहास पर नहीं।’’

राउत यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि इंदिरा गांधी मुम्बई के डॉन करीम लाला से मिला करती थीं और अपने सूत्रों के माध्यम से कुछ फोटो भी लीक करवाए। यह गठबंधन सरकार के लिए काफी घातक था लेकिन कांग्रेस ने परिपक्वता का परिचय दिया और जब आदित्य ठाकरे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले तो इस बात पर चर्चा हुई कि विवाद पैदा करना संजय राऊत की आदत है। आदित्य ठाकरे और राहुल गांधी में इस बात पर सहमति बनी कि राउत की बातों को नजरअंदाज किया जाएगा तथा राहुल गांधी पार्टी के लोगों से उनके बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देने को कहेंगे।

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