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शरद यादव की सक्रियता से बढ़ी लालू की बेचैनी, बड़ा सवाल: क्‍या शुरू की तीसरे मोर्चे की कवायद?

पटना। बिहार की राजनीति में फिर हलचल मची है। समाजवादी नेता शरद यादव (Sharad Yadav) ने महागठबंधन (Grand Alliance) के पांच में से तीन घटक दलों के प्रमुख नेताओं से बंद कमरे में बातचीत कर राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) की बेचैनी बढ़ा दी है। शरद यादव की क्रियाशीलता को प्रत्यक्ष तौर पर तीसरे मोर्चे (Third Front) की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है, किंतु पर्दे के भीतर की कहानी यह भी है आरजेडी पर दबाव डालकर वे लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) से अपने लिए राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्यता सुनिश्चित करना चाहते हैं।

रांची में लालू से मुलाकात, बड़े मुद्दों पर बात

बिहार कोटे की राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल में खाली होंगी। आरजेडी के खाते में दो सीटें आनी तय हैं। शरद यादव भी इसके लिए दावेदार हैं। इसी मकसद से उनकी रांची में शनिवार को लालू से मुलाकात भी हुई। इस दौरान दोनों नेताबों के बीच बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

शरद यादव के नाम पर सहमत नहीं तेजस्‍वी

सूत्रों का कहना है कि शरद के नाम पर तेजस्वी (Tejashwi Yadav) सहमत नहीं हैं। पटना में तीन दिनों तक रहते हुए भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात नहीं हो सकी। जबकि, तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा मानने से परहेज करने वाले जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) और मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) से शरद की लंबी मंत्रणा हुई। इसके भी दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि शरद को तेजस्वी की सरपरस्ती स्वीकार नहीं है और दूसरा, 74 वर्षीय शरद बताना-जताना चाह रहे हैं कि राजनीति में अभी वह पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुए हैं।

तेजस्वी के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश

बहरहाल, शरद यादव महागठबंधन के अन्य घटक दलों के सहयोग से तेजस्वी यादव के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश में हैं। शरद यादव के फ्रंट पर आकर खेलने की बेचैनी का असर है कि मांझी, कुशवाहा और मुकेश सहनी को उनमें नेतृत्व का अक्स दिखने लगा है। हालांकि, आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) कहते हैं कि शरद देश के नेता हैं। बिहार तेजस्वी के लिए है।

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