ब्रेकिंग
फरीदाबाद में सनसनीखेज वारदात: पुलिस चौकी के पास महिला टीचर की दिनदहाड़े चाकू गोदकर हत्या, आरोपी फरार हरियाणा के छोटे शहरों के लिए पहली बार नई टाउन प्लानिंग नीति लागू: बिना लाइसेंस नहीं कटेंगे प्लॉट, बद... झारखंड विधानसभा मानसून सत्र: स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक, 1390 आश्वासनों पर जवाब... रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में गूंजा 'हर-हर महादेव': सावन की पहली सोमवारी पर तड़के 3:30 बजे से उ... JPSC धांधली में CID का पलामू में बड़ा एक्शन: 2 शिक्षकों के ठिकानों पर देर रात छापेमारी, कई डिजिटल एव... जमशेदपुर में फिर गोलीबारी: बर्मामाइंस में युवक आफताब खान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, हालत गंभीर; टीएमएच से... रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में गड़बड़ी पर CBI जांच की मांग: बारिश के बीच जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम ... रांची अपर बाजार में नगर निगम के नोटिस पर भड़के व्यापारी: 12 बजे तक बंद रहीं दुकानें, पार्किंग और नक्... लोहरदगा का अखिलेश्वर धाम: जिसके 'कण-कण' में बसते हैं शिव, सावन में 3 फीट ऊंचे नीले शिवलिंग के दर्शन ... झारखंड 14th JPSC विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र, CID की दबिश तेज; जानें ...
मध्यप्रदेश

जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप, बोले- सिर्फ भाजपा विधायकों को दी जा रही विकास निधि

भोपाल : मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार पर विकास निधि के आबंटन में भेदभाव के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए हैं। जीतू पटवारी ने दावा किया है कि सरकार सिर्फ भाजपा विधायकों को ही विकास निधि दे रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के विधायकों को विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की निधि प्रदान की जा रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के क्षेत्रों को इस विकास निधि से वंचित रखा जा रहा है। यह न केवल जनप्रतिनिधियों के साथ अन्याय है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का भी खुला उल्लंघन है।

जीतू पटवारी ने दावा किया कि भाजपा विधायकों को दी गई विकास निधि का 30-40% हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। कहा, इसका बड़ा हिस्सा ठेकेदार और नौकरशाहों के बीच कमीशनखोरी के तौर पर बंट रही है। जनहित में महज 30-35 फीसदी राशि ही खर्च होती है।

जीतू पटवारी ने मांग की कि
1. सभी विधायकों को, चाहे वे किसी भी दल से हों, समान रूप से 15 करोड़ रुपये की विकास निधि प्रदान की जाए।
2. निधि के आवंटन और व्यय की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर रोक लगाई जा सके।
3. जिन अधिकारियों और ठेकेदारों पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।

Related Articles

Back to top button