ब्रेकिंग
INDIA Alliance Public Impeachment CEC: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन का अन... Dungarpur News: पेसमेकर लगे बीमार पीटीआई की चुनाव ड्यूटी लगाने पर प्रशासन की संवेदनहीनता, ड्यूटी के ... Mohali Crime News: मोहाली में 7 साल की मासूम के साथ शर्मनाक हरकत, दुकान से दूध लेने गई बच्ची के साथ ... Jamia Millia Islamia Protest Ends: जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों की बड़ी जीत, 18 दिन बाद खत्म हुई भू... Bihar Domestic Violence News: फोन-पे के पैसों को लेकर विवाद में हैवान बना पति, 3 घंटे चले ऑपरेशन और ... Delhi Metro Phase 4 Update: कब तक शुरू होगी गोल्डन लाइन और जनकपुरी-आरके आश्रम मेट्रो? जानिए फेज-4 के... Karnataka News: मौलवी ने पहली पत्नी और बच्चों का सच छिपाकर मदरसे की छात्रा से की शादी, पुलिस स्टेशन ... Shubman Gill Temple Device: न्यूजीलैंड दौरे से पहले शुभमन गिल के माथे पर दिखा नया फिटनेस गैजेट, जानि... Credit Card Spending Decline 2026: भारत में क्रेडिट कार्ड खर्च को लगा बड़ा झटका, सितंबर 2026 में आई ... Karbonn Smartphone Comeback: भारतीय बाजार में धमाकेदार वापसी कर रहा है कार्बन, Gen Z और कंटेंट क्रिए...
मध्यप्रदेश

दिल्ली में पर्यावरण पर CAG रिपोर्ट पेश, निगरानी और नियंत्रण में मिलीं कई खामियां

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने मंगलवार को वायु प्रदूषण को लेकर CAG की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश कर दिया है. कैग की रिपोर्ट में कई तरह की खामियां गिनाई गई हैं. रिपोर्ट के कुछ प्वाइंट्स सामने आए हैं जो कि हैरान कर देने वाले हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (CAAQMS) की संख्या CPCB मानकों के अनुसार नहीं थी जिसकी वजह से जिससे AQI डेटा अविश्वसनीय रहा.

वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को लेकर जारी रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि उचित वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए आवश्यक प्रदूषक सांद्रता डेटा उपलब्ध नहीं था, लेड स्तर की माप नहीं की गई. प्रदूषण स्रोतों पर वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण आवश्यक अध्ययन नहीं किए गए. वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का कोई आकलन नहीं किया गया, जिससे स्रोत-विशिष्ट नीतियां बनाने में कठिनाई हुई. 24 निगरानी स्टेशनों में से 10 में बेंजीन स्तर अनुमेय सीमा से अधिक पाया गया, लेकिन पेट्रोल पंपों से होने वाले उत्सर्जन की प्रभावी निगरानी नहीं की गई.

सार्वजनिक परिवहन में भी मिली खामियां

रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सार्वजनिक परिवहन के लिए जो व्यवस्था बनाई गई थी उसमें भी खामियां गिनाई गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन बसों की कमी (6,750 उपलब्ध बनाम 9,000 आवश्यक) थी. बस प्रणाली में संचालन की अक्षमताएं, जैसे कि बसों का ऑफ-रोड रहना और तर्कहीन मार्ग योजना भी शामिल है. इसके अलावा 2011 के बाद से ग्रामीण-सेवा वाहनों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि जनसंख्या बढ़ती रही, पुराने वाहन प्रदूषण में योगदान देते रहे. वहीं, वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन (मोनोरेल, लाइट रेल ट्रांजिट, ट्रॉली बस) के लिए आवंटित बजट का 7 साल तक इस्तेमाल नहीं किया गया.

बसों की सही समय पर नही की गई जांच

रोकथाम और प्रवर्तन रणनीतियों पर भी कैग की रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन बसों की अनिवार्य रूप से माह में दो बार उत्सर्जन जांच नहीं की गई. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, जिसमें अत्यधिक उत्सर्जन वाले वाहन भी पास कर दिए गए. प्रदूषण जांच केंद्रों (PCC) का कोई निरीक्षण या तृतीय-पक्ष ऑडिट नहीं किया गया.आधुनिक तकनीक, जैसे कि रिमोट सेंसिंग डिवाइस, को अपनाने में देरी की गई.

वाहन फिटनेश पर भी नहीं दिया गया ध्यान

इसके अलावा अधिकांश वाहन फिटनेस परीक्षण मैन्युअल रूप से किए गए, जिनमें उचित उत्सर्जन परीक्षण का अभाव था. 2018-19 में 64 फीसदी वाहन, जो फिटनेस परीक्षण के लिए नियत थे, परीक्षण के लिए नहीं पहुंचे.वहीं, स्वचालित वाहन निरीक्षण इकाइयों का न्यूनतम उपयोग, बिना उचित परीक्षण के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए BS-III और BS-IV वाहनों का अनधिकृत पंजीकरण भी इसमें शामिल रहा.

Related Articles

Back to top button