निर्भया केसः तिहाड़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब चारों दोषियों को एक साथ दी गई फांसी

निर्भया को आखिरकार सात साल बाद इंसाफ मिल ही गया। शुक्रवार सुबह तड़के सात बजे निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया। इससे पहले दोषियों को फांसी से बचाने के लिए वकील एपी सिंह की ओर से कई हथकंडे अपनाए गए। चारों दोषियों को फांसी से बचाने के लिए एपी सिंह के द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का रुख अपनाया था। तिहाड़ जेल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब चार दोषियों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया है, इससे पहले 1982 में रंगा-बिल्ला को एक साथ फांसी दी गई थी।
निर्भया के चारों दोषियों विनय-मुकेश-पवन-अक्षय को फांसी देने के लिए तिहाड़ के फांसी घर के कुएं को चौड़ा किया गया था। जिस जेल में अभी ये चारों थे, उससे करीब 200 कदम की दूरी पर फांसी घर बना है जहां कड़ी सुरक्षा में उन्हें ले जाया गया था।
इन चारों की फांसी से पहले तिहाड़ जेल में इनको फांसी पर लटकाया जा चुका है।
1982: रंगा-बिल्ला
1983: मोहम्मद मकबूल भट्ट
1985: करतार सिंह-उजागर सिंह
1989: सतवंत सिंह-केहर सिंह
2013: अफजल गुरु
जहां पर फांसी दी जानी है, वहां 500 गज के एरिए में एक कुआं बना है जिसकी गहराई 12 फीट है। फांसी के वक्त जेल सुपरिडेंटेट, असिस्टेंट जेल सुपरिडेंटट, वार्डन और तमिलनाडु पुलिस के जवान मौके पर मौजूद होंगे। इसके अलावा मेडिकल अफसर, डीएण, एडीएम भी वहां रहेंगे।
- दोषियों को सुबह 4 बजे चारों दोषियों को जगाया गया और चाय-नाश्ता दिया गया। हालांकि उन्होंने चाय नाश्ता नहीं किया।
- सुबह 5 बजे दोषियों से आखिरी इच्छा पूछी गई
- सवा 5 बजे दोषियों को सेल से निकालकर फांसी घर ले जाया गया, इस दौरान चेहरे पर काले कपड़े पहनाए गए।
- फांसी पर लटकाने के आधे घंटे बाद इन्हें मृत घोषित किया गया
- सुबह आठ बजे दीन दयाल हॉस्पिटल में चारों का पोस्टमार्टम होगा
- डॉ. बीएन मिश्रा शवों का पोस्टमार्टम करेंगे
- पोस्टमार्टम के बाद शवों परिजनों को सौंपे जाएंगे





