ब्रेकिंग
PM Modi in Indonesia: 'भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी', इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी ने पेश किया 'गंगा-म... Welcome to the Jungle Budget: 250 करोड़ नहीं, डायरेक्टर अहमद खान ने बताया फिल्म का असली बजट Ramayana Movie Rights: करण जौहर ने 250 करोड़ में खरीदे 'रामायण' के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स, दिवाली पर ... Prabhas Fauzi Update: प्रभास की 'फौजी' में होगा हाई-वोल्टेज एक्शन, 10 जुलाई से शुरू होगी इंटरवल सीन ... Akshay Kumar 2016 Movies: 'एयरलिफ्ट' से 'रुस्तम' तक, जब अक्षय कुमार ने 8 महीने में दी थीं लगातार 3 स... UP ATS Action: लखनऊ NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 13 बांग्लादेशी और 2 रोहिंग्या घुसपैठियों को 5-5 साल की ... डबरा में सफाई कर्मचारी की संदिग्ध मौत, अपहरण के शक में पुलिसकर्मियों पर पिटाई का आरोप Khajrana Civil Hospital: जमीन का नहीं हुआ हस्तांतरण, इसलिए अटका खजराना सिविल अस्पताल का काम Haridwar Mansa Devi Temple: राम मंदिर विवाद के बाद मनसा देवी ट्रस्ट सख्त, पुजारियों के लिए बनाए कड़े... Ketan Agrawal Murder Case: केतन हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, आरोपी चेतन-सिया ने 4 महीने पहले क...
उत्तरप्रदेश

कांवड़ रूट के ढाबा मालिकों को QR कोड पर बतानी होगी पहचान, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के आदेश पर नहीं लगाई रोक

उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को राहत मिल गई है. दरअसल, कांवड़ यात्रा के दौरान ढाबे-रेस्त्रां पर क्यूआर कोड के जरिए पहचान जानने की सुविधा उपभोक्ता के लिए जारी रहेगी. शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा कि कांवड़ यात्रा आखिरी पड़ाव पर है. सभी ढाबा, रेस्त्रां मालिक कानून नियम का पालन करेंगे. ये आदेश जस्टीस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नियमों के तहत उपभोक्ता राजा है. आवेदन का निपटारा किया जाता है. उसने आदेश में कहा कि हमें बताया गया है कि आज यात्रा का अंतिम दिन है. बहरहाल, निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना है इसलिए इस समय हम केवल यह आदेश पारित करेंगे कि सभी संबंधित होटल मालिक वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करने के आदेश का पालन करें. हम स्पष्ट करते हैं कि हम अन्य विवादित मुद्दों पर विचार नहीं कर रहे हैं.

सरकार ने कोर्ट में दी ये दलील

इससे पहले यूपी सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कानून व्यवस्था समेत तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर यह आदेश जारी किया गया. पिछले साल हमारे यहां कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी, जब कांवड़िये इसी तरह के मुद्दों के चलते ढाबों में तोड़फोड़ कर रहे थे इसीलिए पुलिस ने यह आदेश जारी किया था. पिछले साल हमारी बात सुने बिना ही एक अंतरिम आदेश पारित कर दिया गया था. मैं सिर्फ एक केंद्रीय कानून का पालन कर रहा हूं जो पूरे देश पर लागू होता है, सिर्फ कांवड़ यात्रा पर नहीं.

याचिका में सरकार पर क्या लगाए गए थे आरोप?

याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा रूटों पर ढाबों और रेस्त्रां मालिकों की पहचान सार्वजनिक करने संबंधी सभी निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की गई थी. तर्क दिया गया था कि ये निर्देश पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित अंतरिम आदेश के खिलाफ हैं, जिसमें कहा गया था कि ढाबा मालिकों को अपनी पहचान उजागर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

याचिकाकर्ता प्रोफेसर अपूर्वानंद और एक्टिविस्ट आकार पटेल ने तर्क दिया कि कोर्ट के आदेश को दरकिनार करने के लिए सरकारी अधिकारियों ने इस साल नए निर्देश जारी किए हैं, जिनमें कांवड़ रूट पर सभी ढाबों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है, जिन्हें तीर्थयात्री स्कैन करके मालिकों के नाम जान सकते हैं. उनके अनुसार, यह निर्देश धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए है.

Related Articles

Back to top button