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कोरोना संकट से अमेरिका में हालात खराब, सुप्रीम कोर्ट गर्भपात पर करने जा रहा सुनवाई

वाशिंगटन। अमेरिका में जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या पांच लाख का आंकड़े को पार कर गई है जो दुनिया में किसी देश के लिए सर्वाधिक है। इस संकट के बीच अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट गर्भपात को लेकर सुनवाई करने जा रही है। कोरोना वायरस की वजह से अमेरिका में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 5,29,000 हो गई है, जबकि अब तक कुल 20,602 कोरोना पीड़ितों की मौत हो चुकी है।

गर्भपात के अधिकार की वकालत करने वाले अधिवक्ताओं ने शनिवार को अमेरिका सुप्रीम कोर्ट से टेक्सास में गर्भपात के अधिकार को फिर से बहाल करने का आग्रह किया है। कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से राज्य में गर्भपात के अधिकार को निलंबित कर दिया गया है। कोरोना वायरस से संबंधित यह पहली याचिका है अमेरिका की उच्चतम अदालत तक पहुंची हैं, जो लगभग एक महीने से केवल लिखित रूप में चल रही है।

कोर्ट ने 1973 में अपने निर्णय में गर्भपात को वैध बताया था। इसके तहत राज्य को यह तय करने की अनुमति है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान कानून को निलंबित कर सकता है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के लिए एक परीक्षा साबित होगी। अपने चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप अदालत में सिर्फ गर्भपात-विरोधी न्यायाधीशों को ही नियुक्त करने का वादा किया था। जिसका गहरा विरोध हुआ था।

राज्य के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने तर्क दिया कि कोरोना वायरस रोगियों और उनकी देखभाल करने वालों के लिए अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध रखने के लिए इन प्रक्रियाओं को निलंबित कर दिया जाना चाहिए। सेंटर फॉर रिप्रोडक्टिव राइट्स की अध्यक्ष नैन्सी नॉर्थअप ने कहा, ‘यह असाधारण रूप से कठिन समय है, लेकिन यह एक आसान मामला है।’

गर्भपात के अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि वैचारिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इस संकट के समय का फायदा उठाया जा रहा था। इसलिए हम इस मामले को तुरंत अदालत में ले गए हैं। उन्होंने कहा कि गर्भपात के लिए इंतजार नहीं किया जा सकता है। कई महिलाएं गर्भावस्था को समाप्त कराने के लिए पड़ोसी राज्य में जाना चाहती हैं, ऐसे में वायरस फैलने का खतरा ज्यादा है।

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