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विदेश

चीन ने भारत के नए FDI नियमों का किया विरोध, बताया भेदभाव पूर्ण

बीजिंगः चीन ने भारत के नए FDI  नियमों की आलोचना करते हुए इसे भेदभाव पूर्ण बताया है । चीन का कहना है कि विदेशी निवेश के लिए भारत के नियम  WTO के गैर-भेदभाव सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के खिलाफ हैं। चीन ने सोमवार को कहा कि कोरोनो वायरस प्रकोप के दौरान चीनी कंपनियों द्वारा टेकओवर को रोकने के कदम के रूप में सरकार ने पड़ोसी देशों की कंपनियों से निवेश की जांच करवाई। भारत के ये नियम अवसरवादी अधिग्रहण/ अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए थे जिनमें चीन का जिक्र नहीं था। चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने एक बयान में कहा, “चीनी निवेशकों पर इस नीति का प्रभाव स्पष्ट है।”

बता दें कि कोरोना महामारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने अवसरवादी अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा FDI नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत जिन देशों की सीमा भारत से लगती है, वहां के निवेशक सरकारी अनुमति के बिना यहां निवेश नहीं कर सकते हैं। मतलब चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान के निवेशकों या कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति के लिए सरकार से परमिशन की जरूरत होगी। यह जानकारी DPIIT ने दी है। सरकार के इस फैसले का असर अभी चीन के निवेशकों पर होगा। वर्तमान में केवल बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले FDI के लिए सरकार के परमिशन की जरूरत होती थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एशिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन कोरोना वायरस के संकट में भी अपनी चाल चल रहा है। दरअसल, बीते दिनों चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने हाउसिंग लोन देने वाली भारत की दिग्गज कंपनी HDFC लिमिटेड के 1.75 करोड़ शेयर खरीद लिए हैं।  इस खबर के बाद केंद्र सरकार भारतीय कंपनियों को चीन से बचाने में जुट गई है। यही वजह है कि सरकार ने विदेशी निवेश को लेकर नियमों में बदलाव किया है, हालांकि, सरकार ने इन नियमों को बदलते हुए चीन का जिक्र नहीं किया है।

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