ब्रेकिंग
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली मेट्रो की खास तैयारी: सुबह 4 बजे से शुरू होंगी ट्रेनें, रक्षा मंत्रालय ने ... भगवान गौतम बुद्ध की पावन जन्मस्थली लुंबिनी, 563 ईसा पूर्व रानी मायादेवी ने शाल वृक्ष के नीचे दिया था... महाराष्ट्र राजनीति में हलचल: देर रात वर्षा बंगले पर मिले शिंदे और फडणवीस, रायगढ़ पालक मंत्री और महाम... बागपत में सनसनीखेज डबल मर्डर: 20 दिन से लापता दो दोस्तों के शव मंदिर की धूनी के नीचे दफन मिले, फरार ... भोपाल के बोट क्लब में दिखा अद्भुत नजारा: देश में पहली बार तालाब के बीच बना 'फ्लोटिंग तिरंगा', सीएम म... हरिद्वार में कांवड़ मेले के समापन के बाद महा-सफाई अभियान, घाटों और सड़कों से हटाया जा रहा 7000 मीट्र... राज्यसभा से पास हुआ 'खान और खनिज (विकास एवं नियमन) संशोधन विधेयक 2026', खनिज भूमि पर केंद्रीय नियंत्... पंजाब कांग्रेस में गहराया अंदरूनी संकट, पूर्व सीएम चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के बीच शुरू ह... भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच आयोग ने सौंपी अंतरिम रिपोर्ट, बिहार सरकार का बड़ा फैसला 'हम सरकार को पागल कर देंगे'— रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय अधिवेशन में राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर ...
विदेश

पैसा लो और देश दे दो!” क्या अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए हर नागरिक को देगा 90-90 लाख? जानें वायरल खबर का सच

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने के लिए हर मुमकिन विकल्प पर विचार कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ग्रीनलैंड के लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए एक बेहद चौंकाने वाले प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं. इस प्रस्ताव के तहत हर ग्रीनलैंड नागरिक को $100,000 यानी करीब 90 लाख रुपये तक की एकमुश्त रकम देने की योजना पर चर्चा चल रही है.

बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन में इस मुद्दे को लेकर गंभीर बातचीत हो रही है और ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को अमेरिका के कंट्रोल में लाने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर विचार कर रहा है.अगर यह योजना लागू होती है, तो करीब 57,000 ग्रीनलैंडवासियों को कुल मिलाकर $5.7 बिलियन का भुगतान करना पड़ सकता है.

क्यों इतना अहम है ग्रीनलैंड?

ग्रीनलैंड भले ही आबादी में छोटा हो, लेकिन रणनीतिक और सैन्य नजरिए से यह बेहद अहम माना जाता है. ट्रंप पहले भी साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड का कंट्रोल अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है. उनका कहना है कि यह इलाका सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक तौर पर भी अमेरिका की वैश्विक ताकत के लिए जरूरी है. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने और यूरोप के साथ रिश्ते बनाए रखने के बीच कोई न कोई विकल्प सामने आ सकता है। इस बयान के बाद यूरोपीय देशों में चिंता और नाराज़गी दोनों देखने को मिली.

सैन्य कार्रवाई की धमकी से बढ़ा तनाव

हाल ही में ट्रंप ने यह कहकर माहौल और गरमा दिया कि जरूरत पड़ने पर वह सैन्य विकल्प से भी पीछे नहीं हटेंगे. उनके इस बयान को नाटो देशों के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है. डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों पहले ही साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, और किसी भी तरह की जबरदस्ती नाटो गठबंधन को खतरे में डाल सकती है.

ग्रीनलैंड में मिली-जुली प्रतिक्रिया

ग्रीनलैंड के लोगों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डर और असमंजस का माहौल है. कई लोग ट्रंप की सैन्य धमकियों से चिंतित हैं. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी नालेराक ने इसे मौके की खिड़की बताया है. पार्टी का मानना है कि अमेरिका की दिलचस्पी से ग्रीनलैंड के लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के ठोस मौके मिल सकते हैं. हालांकि पार्टी के नेताओं ने साफ किया कि ग्रीनलैंडवासी न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं और न ही डेनिश, वे सिर्फ ग्रीनलैंडर के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहते हैं.

Related Articles

Back to top button