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उत्तराखंड

हरिद्वार में कांवड़ मेले के समापन के बाद महा-सफाई अभियान, घाटों और सड़कों से हटाया जा रहा 7000 मीट्रिक टन कचरा

हरिद्वार (उत्तराखंड): हरिद्वार में 12 दिवसीय भव्य कांवड़ मेले के विधिवत समापन के उपरांत शहर के पौराणिक घाटों, मुख्य सड़कों और कांवड़ पटरी मार्गों पर भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा जमा हो गया।

प्रशासनिक दावों के अनुसार, इस वर्ष लगभग पौने 5 करोड़ से अधिक कांवड़ श्रद्धालु हरिद्वार पहुँचे थे। गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर प्रस्थान करने के बाद कांवड़िये कई स्थानों पर जूते-चप्पल, गंदे वस्त्र, फटे बैग, प्लास्टिक की बोतलें और पॉलीथीन छोड़ गए। संपूर्ण मेला अवधि के दौरान पूरे नगर क्षेत्र में लगभग 7000 मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र हुआ, जिसमें से अकेले 4500 मीट्रिक टन कचरा गंगा घाटों के निकट जमा हुआ था। मेला समाप्त होते ही नगर निगम, जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से विशेष सफाई अभियान प्रारंभ कर दिया।

🧹 कांवड़ मेला संपन्न होते ही एक्शन मोड में नगर निगम, हरकी पैड़ी पर देर रात तक डटे रहे 1000 सफाई कर्मचारी

कांवड़ यात्रा की समाप्ति के पश्चात हरिद्वार की स्वच्छता व्यवस्था को पुनर्बहाल करना प्रशासन के सम्मुख सबसे विकट चुनौती सिद्ध हुआ।

हरकी पैड़ी एवं आसपास के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं के अप्रत्याशित दबाव के कारण दैनिक सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिससे स्थान-स्थान पर कचरे के विशाल ढेर दिखाई देने लगे थे। मेले की अंतिम रात्रि से ही नगर निगम की विशेष टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। लगभग 1000 कर्मचारियों ने देर रात तक अनवरत कार्य कर हरकी पैड़ी और आस-पास के क्षेत्रों को चमकाया। श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी इस महा-सफाई में सक्रिय सहभागिता निभाई। प्रशासन का ध्येय आगामी संध्या की भव्य गंगा आरती से पूर्व हरकी पैड़ी को पूर्णतः निर्मल बनाना था, जिसे कर्मचारियों की निष्ठा से प्राप्त कर लिया गया।

📦 गंगा घाटों पर जमा हुआ 4500 मीट्रिक टन कचरा, सुभाष घाट से अलकनंदा घाट तक चला सफाई अभियान

नगर निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार शहर में कुल 7000 मीट्रिक टन से अधिक अपशिष्ट उत्पन्न हुआ, जिसमें से 4500 मीट्रिक टन कचरा सीधे गंगा तटों पर एकत्र हुआ।

हरकी पैड़ी के अतिरिक्त सुभाष घाट, कुशा घाट, मालवीय घाट, गऊघाट और अलकनंदा घाट समेत लगभग सभी तटबंधों पर गंदगी का प्रभाव देखा गया। कांवड़ियों के अनवरत आवागमन के कारण सफाई कर्मियों को भीड़ के बीच तत्काल सफाई कार्य संपादित करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

🥾 घाटों पर छूटे जूते-चप्पल और प्लास्टिक कचरे, पुरोहितों व पुजारियों ने जताया दुख

हरकी पैड़ी के तीर्थ पुरोहितों ने अवगत कराया कि कांवड़ मेले के दौरान अनेक श्रद्धालु मर्यादा के विपरीत जूते-चप्पल पहनकर घाटों पर भ्रमण करते पाए गए।

इसके अतिरिक्त, बचा हुआ खाद्य पदार्थ, प्लास्टिक की बोतलें, फटे वस्त्र और थैले घाटों पर ही छोड़ दिए गए। श्री अष्टखंभा गंगा मंदिर के पुजारी देशबंधु शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं के प्रस्थान के उपरांत संपूर्ण हरकी पैड़ी क्षेत्र में कचरा बिखरा हुआ था। यद्यपि, नगर निगम एवं गंगा सभा के कार्यकर्ताओं ने अहोरात्र (दिन-रात) परिश्रम कर क्षेत्र को पुनः स्वच्छ व पवित्र बना दिया।

✅ 95 प्रतिशत घाटों की सफाई पूर्ण, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और रीसाइकिलिंग की प्रक्रिया शुरू

नगर आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार, कांवड़ यात्रा के समाप्त होते ही स्वच्छता अभियान की गति तीव्र कर दी गई थी।

डाक कांवड़ के समय संकरी गलियों व प्रमुख मार्गों पर वाहनों के भारी दबाव के कारण कचरा उठान बाधित हुआ था। अतः प्रशासन ने सर्वप्रथम घाटों और मुख्य संपर्क मार्गों को प्राथमिकता दी। वर्तमान में हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, अलकनंदा, बिरला घाट और विष्णु घाट समेत लगभग 95 प्रतिशत घाटों को पूर्णतः साफ कर दिया गया है। एकत्र किए गए अपशिष्ट को पृथक (Segregate) कर उपयोगी सामग्री को रीसाइकिलिंग हेतु प्रसंस्करित किया जाएगा।

🚜 दूसरे दिन भी जारी रहा विशेष अभियान, 700 से अधिक लोगों ने 30 टन अतिरिक्त कचरा हटाया

मेला समाप्ति के दूसरे दिवस भी हरिद्वार में विस्तृत स्तर पर स्वच्छता अभियान संचालित किया गया।

जिला प्रशासन तथा नगर निगम ने विभिन्न विभागों और स्वयंसेवी संगठनों के समन्वय से बिरला घाट, रोडीबेलवाला मैदान, बैरागी कैंप, लालजीवाला तथा ग्रामीण इलाकों के कांवड़ मार्गों पर गहन सफाई की। इस अभियान में नगर निगम, जिला पंचायत, खंड विकास अधिकारी, नगर पालिका, आपदा प्रबंधन विभाग, शांतिकुंज तथा वन विभाग के 700 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया। केवल एक दिवस में 30 टन से अधिक कचरा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से निस्तारण हेतु भेजा गया।

🌸 शांतिकुंज व अखाड़ा परिषद का सराहनीय योगदान, संतों ने श्रद्धालुओं से की प्लास्टिक न लाने की अपील

इस जन-अभियान में धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं ने भी महती भूमिका निभाई। शांतिकुंज के समर्पित स्वयंसेवकों एवं साधु-संतों ने गंगा तटों की स्वच्छता में श्रमदान किया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने सफाई में जुटी संस्थाओं के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने भावी कांवड़ यात्रियों से मर्मस्पर्शी अपील की कि वे आगामी यात्राओं में प्लास्टिक का उपयोग पूर्णतः वर्जित करें और अपना प्रयुक्त सामान वापस साथ ले जाएं।

📢 प्रशासन की निरंतर अपीलों के बाद भी नहीं बदला ढर्रा, गंगा सभा ने जताई चिंता

मेला प्रारंभ होने से पूर्व जिला प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं द्वारा स्वच्छता बनाए रखने हेतु व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए गए थे, फिर भी धरातल पर आशातीत परिवर्तन देखने को नहीं मिला।

गंगा सभा के अध्यक्ष पंडित नितिन गौतम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि श्रद्धालु बड़ी मात्रा में अजैविक कचरा घाटों पर छोड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि गंगा सभा और मेला प्रशासन के साझा प्रयासों से हरकी पैड़ी क्षेत्र को त्वरित रूप से स्वच्छ कर लिया गया है।

🌊 गंगा और हरिद्वार को स्वच्छ रखना सर्वोच्च प्राथमिकता, भविष्य के लिए ठोस नीति की आवश्यकता

प्रतिवर्ष कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों कांवड़ियों के आगमन से हरिद्वार की नागरिक व सफाई व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव निर्मित होता है।

प्रशासन ने इस बार त्वरित कार्यवाही कर कचरा तो हटा दिया, परंतु भविष्य में ऐसे वृहद् आयोजनों में कचरा न्यूनीकरण (Garbage Reduction) हेतु दीर्घकालिक समाधान खोजना अत्यंत आवश्यक है। हरिद्वार की गरिमा और पतित पावनी गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं में नागरिक बोध (Civic Sense) जागृत करना और प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करना प्रशासन व समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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