अवैध धान पर संयुक्त टीम की बड़ी कार्रवाई, 7 लाख 69 हजार रुपये का 349 क्विंटल धान जब्त, गोदाम सील
बलौदाबाजार: जिले में अवैध धान की खरीद फरोख्त पर प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है. खरीफ विपणन वर्ष के दौरान समर्थन मूल्य पर धान बेचने को लेकर केंद्रों में भीड़ बढ़ जाती है और इसी समय अवैध कारोबारियों की सक्रियता भी तेज हो जाती है. इसी वजह से इस साल कलेक्टर दीपक सोनी ने साफ निर्देश दिए हैं कि धान खरीदी केंद्रों के आसपास किसी भी तरह का अवैध व्यापार, अवैध परिवहन या अवैध स्टॉक जैसी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.
इन्हीं निर्देशों के तहत गुरुवार को संयुक्त जांच दल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 349 क्विंटल अवैध धान, जिसकी कीमत लगभग 7 लाख 69 हजार रुपये आंकी गई है, जब्त कर लिया. यह कार्रवाई भाटापारा विकासखंड के मोपका क्षेत्र में संचालित एक निजी भंडारण परिसर में की गई, जहां धान को कथित रूप से अवैध रूप से खरीदा और जमा किया जा रहा था.
कार्रवाई कहां हुई?
प्राप्त जानकारी के अनुसार संयुक्त टीम ने मोपका स्थित मेसर्स नारायण साहू अनाज भंडार में जांच की. इस दौरान गोदाम में जमा 349.60 क्विंटल धान के लिए कोई वैध दस्तावेज, खरीदी बिल या वैधानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं मिला. टीम ने जब गोदाम के संचालक नारायण साहू से पूछताछ की तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. दस्तावेजों में स्पष्ट विरोधाभास मिला और धान की वास्तविक खरीद और स्रोत का कोई रिकॉर्ड उनके पास मौजूद नहीं था. इसके बाद टीम ने धान को जब्त कर लिया और मंडी अधिनियम 1972 के तहत प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी. इसके साथ ही गोदाम को संचालक की उपस्थिति में सील कर दिया गया ताकि आगे कोई सामग्री बाहर या अंदर न जा सके.
दूसरे गोदाम में भी जांच, स्टॉक मिला सही
इसी क्रम में टीम ने एसआर ट्रेडिंग कंपनी में भी औचक निरीक्षण किया. इस गोदाम में रखे गए धान के स्टॉक की जांच की गई, जहां दस्तावेजों और वास्तविक स्टॉक में कोई गड़बड़ी नहीं मिली. प्रशासन का कहना है कि इस तरह की औचक जांच आगे भी चलती रहेंगी और यह कार्रवाई केवल शुरुआत है.
कलेक्टर के निर्देश: अवैध धान व्यापार पर पूर्ण रोक
कलेक्टर दीपक सोनी ने पहले ही कहा था कि इस बार जिले में अवैध धान व्यापार और बिचौलियागिरी को किसी भी स्तर पर सहन नहीं किया जाएगा.
उनके अनुसार:
- समर्थन मूल्य पर धान बेचने की प्रक्रिया किसानों के हित में बनाई गई है
- अवैध कारोबारियों के कारण असली किसानों को नुकसान होता है
- समर्थन मूल्य की व्यवस्था को बचाने के लिए कार्रवाई जरूरी है
कलेक्टर ने सभी तहसीलदारों, खाद्य विभाग और मंडी विभाग को निर्देश दिया है कि हर खरीद केंद्र के आसपास कड़ी निगरानी रखी जाए. इसके साथ ही उड़नदस्ता दलों को भी सक्रिय किया गया है, जो गांवों, गोदामों और परिवहन मार्गों पर नजर रख रहे हैं.
अवैध धान कैसे खपाया जाता है? – प्रशासन की जांच में मिले पैटर्न
जिले में पिछले कुछ वर्षों से अवैध धान खपाने की कोशिशों में कई पैटर्न सामने आए हैं. प्रशासन के अनुसार कुछ सामान्य तरीके ऐसे हैं:
1. अन्य राज्यों से धान लाकर स्थानीय समर्थन मूल्य पर बेचना
कई बार बाहरी राज्य का सस्ता धान जिले में लाकर किसानों के नाम पर खपाया जाता है.
2. गैर-पंजीकृत स्टॉक को किसानों से मिलकर बेचना
कुछ बिचौलिए किसानों से IDs और बैंक खातों का उपयोग कर फर्जी बिक्री दिखाते हैं.
3. प्राइवेट गोदामों में धान जमा कर मौका देखकर उतारना
यह धान अक्सर अवैध खरीद पर आधारित होता है और बिना बिल के जमा होता है.
4. सूचना तंत्र कमजोर होने पर खरीदी केंद्रों में धान घुसाना
इन्हीं सब चीजों को रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने जिलेभर में 12 चेक पोस्ट भी सक्रिय कर दिए हैं.
संयुक्त जांच दल कैसे काम करता है?
कलेक्टर ने एक संयुक्त जांच दल गठित किया है जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हैं. टीम आकस्मिक निरीक्षण करती है और किसी भी संदेह पर तुरंत गोदाम, दुकान या वाहन की जांच करती है.
इस कार्रवाई में शामिल अधिकारी
- तहसीलदार यशवंत राज
- सहायक खाद्य अधिकारी लक्ष्मण कश्यप
- मंडी उपनिरीक्षक प्रफुल मांझी
- मंडी उपनिरीक्षक श्यामलाल
टीम ने मौके पर पहुंचकर पहले दस्तावेज मांगे, उसके बाद स्टॉक की वास्तविक भौतिक जांच की और फिर अवैध धान को जब्त किया. गोदाम को सील करते समय पंचनामा भी तैयार किया गया.
मंडी अधिनियम 1972 क्या कहता है?
मंडी अधिनियम 1972 के अनुसार:
- बिना पंजीकरण अनाज का व्यापार करना
- अवैध स्टॉक रखना
- बिना लाइसेंस धान की खरीद-फरोख्त करना
- गलत तरीके से धान का भंडारण करना
इन सभी गतिविधियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है. किसी भी व्यापारिक संस्था को कृषि उपज का भंडारण करने के लिए पंजीकरण जरूरी होता है. कलेक्टर ने साफ कहा है कि इस अधिनियम के उल्लंघन पर किसी को राहत नहीं दी जाएगी.






