ब्रेकिंग
केरल के कोच्चि में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी कॉकरोच जनता पार्टी, मुख्य चुना... आरा में रिटायर्ड कस्टम अधिकारी हत्याकांड का मुख्य शूटर मुठभेड़ में घायल, पुलिस ने पैर में मारी गोली झारखंड के खूंटी में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा— तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर खड़े लोगों को कुचल, 10... महाराष्ट्र के जलगांव में एसीबी का बड़ा एक्शन— 10 हजार की घूस लेते पकड़ा गया अधिकारी, घर और लॉकर से न... देश के मौसम का हाल, उत्तर भारत में बढ़ी ठंड और दक्षिण के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भिंड में कमरे का फर्श धंसने से पलंग समेत 16 फीट गहरे गड्ढे में समाई महिला, सिंधिया रियासत के दौर से ... दिल्ली में दिवाली से पहले ही हवा हुई बेहद जहरीली, कई इलाकों में एक्यूआई 450 के पार— गंभीर श्रेणी में... या एसी, टीवी या फ्रिज खरीदते समय क्या एक्सटेंडेड वारंटी लेना सच में फायदेमंद है? जानिए इसके फायदे और... मुंबई के कांदिवली में बुजुर्ग महिला के साथ लूट, परिचित बनकर आया बदमाश गले से सोने की चेन छीनकर फरार उत्तरकाशी के केदारताल एवलांच में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों की दर्दनाक दास्तान, अंतिम सांस...
हरियाणा

हिसार में हत्या प्रयास में मां-बेटी को 3 साल कैद, 500 रुपए जुर्माना भी लगाया

हिसार : हिसार जिले के गांव संडोल की रहने वाली मां-बेटी को हत्या प्रयास के मामले में 3 साल की कैद हो गई है। यह फैसला हिसार की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अनुदीप कौर भट्‌टी की अदालत ने सुनाया। कोर्ट ने मां-बेटी पर 500 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक महीने की अतिरिक्त कैद काटनी पड़ेगी।

दरअसल बता दें कि 2020 में अग्रोहा में लड़ाई झगड़े के दौरान गांव संडोल के जसवंत की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने सुनील, प्रदीप, मोनी देवी, सुनीता और निर्मला पर बीएनएस की धारा 147, 149 और 302 के तहत केस दर्ज किया था। मगर बाद में कोर्ट में 302 का मामला 307 में कंवर्ट हो गया। कोर्ट ने माना यह हत्या जानबूझकर नहीं की गई। लड़ाई झगड़े के दौरान जसवंत की मौत हुई थी। इस मामले की सुनवाई 4 साल, 9 महीने और 14 दिन चली।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी अपराधी को पूरी तरह से समाप्त करने वाला या पूरी तरह से सुधारने वाला नहीं मानना चाहिए। सजा सुनाते समय अपराधी की उम्र, पिछला रिकॉर्ड, सुधार की संभावना अपराध की परिस्थितियां माऔर यने रखती हैं। अदालत ने माना कि दोषियों ने अपने कार्य के परिणामों का पूरा ज्ञान होने के बावजूद अपराध किया, लेकिन उनकी जीवन की कठिनाइयों और उम्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Related Articles

Back to top button