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मध्यप्रदेश

भिंड में कमरे का फर्श धंसने से पलंग समेत 16 फीट गहरे गड्ढे में समाई महिला, सिंधिया रियासत के दौर से जुड़ा है रहस्य

भिंड: मध्य प्रदेश के भिंड जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ अपने घर के कमरे में सुकून से पलंग की चादर बदल रही एक महिला के पैरों तले अचानक जमीन खिसक गई। पलंग पर मौजूद 45 वर्षीय महिला बिना किसी चेतावनी या भूकंप के सीधे 16 फीट गहरे अंधेरे गड्ढे में जा समाई। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में महिला की जान बच गई और वह सुरक्षित रही। परिजनों और स्थानीय पड़ोसियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए सीढ़ी के सहारे बड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला, जिसके बाद घायल महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उसका इलाज जारी है।

निवासी अनुराग मिश्रा के घर हुई घटना, गर्ल्स स्कूल वाली गली में चादर बदलते वक्त हुआ हादसा

यह पूरी घटना भिंड शहर के अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध गर्ल्स स्कूल वाली गली की है। मकान मालिक पंडित अनुराग मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके चचेरे भाई आदित्य मिश्रा की पत्नी 45 वर्षीय निशि मिश्रा अपने कमरे में पलंग की चादर ठीक कर रही थीं। ठीक उसी वक्त कमरे का पक्का फर्श अचानक से टूटकर नीचे बैठ गया। पलंग पर खड़ी निशि मिश्रा को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला और वह पलंग समेत सीधे नीचे बने विशाल गड्ढे में जा गिरीं।

रिश्तेदार गए थे एक निमंत्रण में, घर लौटने पर नजारा देख उड़े होश— सीढ़ी उतारकर किया गया सुरक्षित रेस्क्यू

सबसे खास बात यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय परिवार के बाकी सभी सदस्य किसी पारिवारिक निमंत्रण में शामिल होने के लिए घर से बाहर गए हुए थे। जब परिजन वापस लौटे तो कमरे का ऐसा वीरान नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। फर्श की जगह वहाँ एक बड़ा गड्ढा नजर आ रहा था और निशि उसके अंदर फंसी थीं। इसके तुरंत बाद परिवार के सदस्य अनूप मिश्रा और आसपास के पड़ोसी बिना एक पल गंवाए मदद के लिए दौड़े। उन्होंने गड्ढे के भीतर एक सीढ़ी उतारी और कड़ी मशक्कत के बाद महिला को बाहर निकाला, जिसके बाद उन्हें फौरन अस्पताल पहुँचाया गया।

100 साल पुराना इतिहास: सिंधिया रियासत के दौर की अनाज की खंती से जुड़ा है मकान का रहस्य

इस अनोखे और खतरनाक हादसे के पीछे की वजह जानकर हर कोई अवाक रह गया है। दरअसल, जिस मकान में यह घटना घटी है, उसके ठीक नीचे देश की आजादी से पहले का एक पुराना भूमिगत गोदाम यानी अनाज की खंती बनी हुई थी। मकान मालिक अनुराग मिश्रा के मुताबिक, उनके परदादा पंडित मदन मोहन मिश्रा सिंधिया रियासत के शासनकाल में ऑनरेरी मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत थे। वे स्थानीय वनखंडेश्वर महादेव मंदिर के माफीदार पुजारी भी थे। उस दौर में आसपास के ग्रामीण इलाकों से कर (लगान) वसूली और अनाज जमा करने का जिम्मा उनके पास हुआ करता था, और उस अनाज को सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए जमीन के भीतर एक बड़ी खंती का निर्माण कराया गया था, जहाँ उस समय कचहरी भी लगती थी।

पानी के रिसाव से खोखली हो गई थी जमीन, फर्श धंसने की वजह से खड़े हुए पुराने मकानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

परिवार के अनुसार, वर्ष 1980 में उनके पिता और चाचा ने इस पुराने मकान का जीर्णोद्धार कराया था, जिसके दौरान उस अनाज की खंती को बंद कर दिया गया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्षों से जमीन के अंदर लगातार पानी का रिसाव होने के कारण खंती में भरी हुई मिट्टी धीरे-धीरे बहती चली गई, जिससे अंदर एक बड़ा खोखला और खाली स्थान बन गया था। बुधवार की रात मिट्टी पर भारी दबाव पड़ने के कारण कमरे का वह पुराना फर्श अचानक नीचे धंस गया। गड्ढे के निचले हिस्से में पानी भी भरा हुआ बताया जा रहा है। इस दुर्घटना ने पुराने शहरों और ऐतिहासिक मकानों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि ऐसे कई पुराने कुएं और तहखाने आज भी ढके हुए हैं जिनकी समय पर जांच होना बेहद जरूरी है।

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