उत्तरकाशी के केदारताल एवलांच में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों की दर्दनाक दास्तान, अंतिम सांस तक लड़ती रहीं जिंदगी की जंग

लखनऊ/उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित केदारताल ट्रेक के दौरान आए भीषण हिमस्खलन (एवलांच) में अपनी जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों, 30 वर्षीय वर्तिका वर्मा और 35 वर्षीय दीपिका वर्मा की दर्दनाक विदाई ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। सर्च ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के खुलासे के अनुसार, दोनों बहनें अंतिम क्षणों तक जीवन के लिए संघर्ष करती रहीं। गत बुधवार को जब सर्च टीम को दीपिका का शव मिला, तो उनके शरीर पर कई अतिरिक्त गर्म कपड़े लिपटे हुए पाए गए। कड़ाके की ठंड और माइनस पंद्रह डिग्री तापमान से अपनी बड़ी बहन दीपिका को सुरक्षित रखने के लिए छोटी बहन वर्तिका ने अपने हिस्से के गर्म कपड़े भी उन्हें पहना दिए थे। हालांकि, अत्यधिक हिमपात, जमा देने वाली ठंड और सिर पर लगी गंभीर चोटों के कारण दोनों बहनों की सांसें थम गईं।
गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे दोनों बहनों के पार्थिव शरीर, पिता का रो-रोकर बुरा हाल— “मेरी बेटियों की विदाई है, मैं कैसे बैठ जाऊं”
बीते गुरुवार की सुबह लगभग 10:10 बजे एम्बुलेंस के माध्यम से जब दोनों बहनों के पार्थिव शरीर लखनऊ के गुड़ंबा क्षेत्र स्थित गायत्रीपुरम (कुर्सी रोड) आवास पर पहुँचे, तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। अपनी दोनों जवान बेटियों के शवों से लिपटकर पिता श्रीनारायण वर्मा बुरी तरह फफक पड़े। उन्होंने बिलखते हुए कहा, “इतने लाड़-प्यार से पाला था, आज मेरी दोनों बेटियों की अर्थी उठ रही है… ऐसी विदाई किसी पिता को न मिले।” जब आसपास के सांत्वना दे रहे लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कुर्सी पर बैठने का आग्रह किया, तो वे फूट-फूटकर रोते हुए बोले, “आज मेरी बेटियों की विदाई का दिन है, भला मैं कैसे बैठ जाऊँ।” इसके पश्चात दोपहर करीब 12:48 बजे शव वाहन से दोनों बहनों को अंतिम संस्कार के लिए भैंसाकुंड घाट ले जाया गया, जहाँ भारी नम आंखों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
ट्रेक पर जाने से पहले दीपिका ने जताई थी अनहोनी की आशंका, परिजनों ने ट्रेकिंग कंपनी पर सुरक्षा में गंभीर चूक का लगाया गंभीर आरोप
मृतक दीपिका के एक करीबी मित्र ने खुलासा किया कि ट्रेकिंग पर रवाना होने से पहले खरीदारी के दौरान दीपिका ने अपनी बहन वर्तिका से कहा था कि “इस समय मन बिल्कुल ठीक नहीं लग रहा है, जाने की इच्छा नहीं हो रही है, क्यों न इस प्लान को टालकर दिसंबर में चला जाए।” लेकिन वर्तिका के दफ्तर के एक साथी के अचानक यात्रा रद्द कर देने के कारण दीपिका अपनी बहन के साथ जाने के लिए राजी हो गईं। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने ‘सोल सीकर’ नामक ट्रेकिंग कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनी ने सुरक्षा के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूली थी, लेकिन जब हादसा हुआ तो कंपनी ने केवल अपने चार कर्मचारियों को ही हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाल लिया और बाकी के 12 सदस्यों वाले दल को भगवान भरोसे छोड़ दिया। मृतका के भाई अतुल ने स्पष्ट किया है कि परिवार अब इस ट्रेकिंग कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कड़ी कानूनी लड़ाई लड़ेगा।
26 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चला घटनाक्रम— जानिए केदारताल ट्रेक हादसे से जुड़े 11 दिनों की पूरी और क्रमानुसार टाइमलाइन
इस पूरी दर्दनाक घटना से जुड़े मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार रहे हैं:
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26 अक्टूबर 2026: ट्रेकिंग एजेंसी को उत्तरकाशी में तीन दिवसीय केदारताल ट्रेक के संचालन हेतु आधिकारिक अनुमति प्राप्त हुई।
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27 अक्टूबर 2026: दीपिका लखनऊ से दिल्ली पहुंचकर वर्तिका से मिलीं, जिसके बाद दोनों 12 सदस्यीय ट्रेकर्स दल के साथ गंगोत्री के लिए रवाना हुईं।
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28 अक्टूबर 2026: पर्वतीय क्षेत्र में मौसम खराब होने और भारी हिमपात का आधिकारिक अलर्ट जारी किया गया, जिसके बाद टीम से संपर्क टूटना आरंभ हुआ।
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29-30 अक्टूबर 2026: केदारताल के समीप अचानक भीषण हिमस्खलन हुआ, जिसमें 12 सदस्यीय पूरा दल बर्फ के बीच फंस गया। 30 अक्टूबर को सैटेलाइट और एसओएस के जरिए मदद की गुहार लगाई गई।
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31 अक्टूबर 2026: ट्रेकिंग कंपनी ने अपनी प्राथमिकता दिखाते हुए केवल अपने 4 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू किया, जबकि अन्य ट्रेकर्स फंसे रहे।
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01 से 04 नवंबर 2026: सेना और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। 3 नवंबर को टेंट और दो शव बरामद हुए, जबकि 4 नवंबर को वर्तिका और दीपिका के शव भी मिल गए, जिन्हें पोस्टमार्टम के बाद लखनऊ भेजा गया।
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05 नवंबर 2026: सुबह 10:10 बजे शव गायत्रीपुरम पहुँचे और दोपहर के समय भैंसाकुंड घाट पर दोनों बहनों का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।





