या एसी, टीवी या फ्रिज खरीदते समय क्या एक्सटेंडेड वारंटी लेना सच में फायदेमंद है? जानिए इसके फायदे और नुकसान

नई दिल्ली: बाजार में जब भी कोई नया इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कि एयर कंडीशनर (AC), टेलीविजन (TV), रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), लैपटॉप या कोई अन्य गैजेट खरीदने जाते हैं, तो विक्रेता या सेल्समैन अक्सर आपको एक्सटेंडेड वारंटी (Extended Warranty) खरीदने की सलाह जरूर देता है। ठीक इसी प्रकार, ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी खरीदारी करते वक्त कुछ अतिरिक्त शुल्क चुकाकर वारंटी अवधि बढ़ाने का विकल्प सामने आ जाता है। कई बार दुकानदार इस तरह से बात रखते हैं कि यदि आपने एक्सटेंडेड वारंटी नहीं ली, तो भविष्य में आपको किसी बड़ी तकनीकी खराबी के चलते भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई इस पर अतिरिक्त पैसे खर्च करना आवश्यक है? या फिर यह केवल कंपनियों के लिए मुनाफा कमाने का एक जरिया मात्र है? आइए इस पूरे विषय को गहराई से समझते हैं।
क्या होती है एक्सटेंडेड वारंटी और किस तरह काम करती है यह अतिरिक्त सेवा?
जब ग्राहक कोई भी नया इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदता है, तो निर्माता कंपनी उसके साथ एक निश्चित समय-सीमा की स्टैंडर्ड वारंटी प्रदान करती है, जो आमतौर पर 1 से 2 वर्ष की होती है। इस समयावधि के भीतर यदि उस प्रोडक्ट में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी आती है, तो कंपनी अपनी निर्धारित शर्तों के तहत उसकी मुफ्त मरम्मत करती है या जरूरत पड़ने पर खराब पुर्जे बदल देती है। एक्सटेंडेड वारंटी इसी समय-सीमा को आगे विस्तारित करने का एक विकल्प होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि किसी फ्रिज या एसी पर कंपनी 2 साल की वारंटी दे रही है, तो आप अतिरिक्त भुगतान करके उस अवधि को 1 या 2 साल और आगे बढ़वा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए ग्राहक को अलग से शुल्क चुकाना पड़ता है।
एक्सटेंडेड वारंटी लेने के प्रमुख फायदे— जानिए किन परिस्थितियों में मिल सकती है राहत
इस अतिरिक्त वारंटी का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि वारंटी की बढ़ी हुई अवधि के दौरान यदि उपकरण में कोई गंभीर खराबी आ जाती है, तो उसकी रिपेयरिंग पर आने वाला भारी-भरकम खर्च बच जाता है। कई प्लान्स में पार्ट्स बदलने और समय पर फ्री सर्विसिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल होती हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से उस विशेष वारंटी प्लान की नियम और शर्तों पर निर्भर करता है। यहाँ यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है कि एक्सटेंडेड वारंटी को लेकर सरकार की तरफ से कोई एक समान या कड़े नियम निर्धारित नहीं किए गए हैं; बल्कि अलग-अलग ब्रांड्स और सर्विस प्रोवाइडर्स अपने नियमों के आधार पर ये पैकेज बेचते हैं। इसलिए इसे खरीदने से पहले इसकी कवरेज की पूरी जानकारी होना अनिवार्य है।
कंपनियों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया— जानिए कैसे होता है निर्माताओं और सर्विस सेंटर्स को फायदा
व्यापारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो एक्सटेंडेड वारंटी केवल ग्राहकों के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों के लिए भी मुनाफे का एक बड़ा स्रोत होती है। आमतौर पर अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद अपनी शुरुआती मानक वारंटी के समय के दौरान खराब नहीं होते हैं। ऐसे में, ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे वसूलने के बाद भी कंपनियों को मरम्मत या रखरखाव पर कोई खास खर्च नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा, वारंटी बढ़वाने वाले अधिकांश ग्राहक किसी भी खराबी आने पर स्थानीय मैकेनिक के बजाय सीधे कंपनी के अधिकृत (Authorized) सर्विस सेंटर पर ही जाते हैं, जिससे ब्रांड के सर्विस नेटवर्क और ऑरिजिनल स्पेयर पार्ट्स की बिक्री को भी मजबूती मिलती है।
एक्सटेंडेड वारंटी खरीदने से पहले जरूर रखें इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान, सेल्समैन के बहकावे में आने से बचें
किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए एक्सटेंडेड वारंटी का भुगतान करने से पहले यह जांच लेना जरूरी है कि वह सर्विस सीधे उत्पाद बनाने वाली मूल कंपनी (OEM) दे रही है या फिर किसी थर्ड-पार्टी या रिटेलर द्वारा दी जा रही है। इसके नियम, क्लेम करने की प्रक्रिया और हिडन चार्जेस को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या दुकानदार केवल अपना कमीशन बनाने के लिए वारंटी बेच देते हैं, लेकिन जब वास्तव में उपकरण खराब होता है और क्लेम करने की बारी आती है, तो ग्राहकों को लंबी कागजी कार्रवाई और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, सिर्फ सेल्समैन की मीठी बातों में आकर बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। पहले यह सुनिश्चित करें कि वारंटी में कौन-कौन से पार्ट्स कवर हैं, उसकी समयावधि क्या है और सर्विस कहाँ मिलेगी, उसके बाद ही कोई ठोस निर्णय लें।





