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लॉकडाउन: भुखमरी के कगार पर कुली, सरकार से लगाई मदद की गुहार

लखनऊ: कोरोना महामारी के चलते देश में 3 मई तक लॉकडाउन घोषित किया गया है। लॉकडाउन की वजह से सभी काम-धंधे बंद हो जाने से गरीब और मजदूर वर्गों पर रोजी रोटी का संकट मंडराने लगा है। इतना ही नहीं इस महामारी ने देश की गरीब जनता को भुखमरी की कगार पर भी लाकर खड़ा कर दिया है। गरीब-मजदूर वर्ग के बाद अब इसमें कुली वर्ग का नाम भी जुड़ गया है। 

रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के आवागमन के रुकने से लोगों का बोझ उठाने वाले कुली परेशान हैं। जनता का बोझ उठाकर अपना व अपने परिवार का पेट पालने वाले कुलियों का बोझ न तो सरकार उठा रही है और न ही कोई और मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा है। जिसकी वजह से कुली आज भुखमरी की कगार पर हैं। लॉकडाउन के बीच न तो उनके पास खाना है और ना ही खाने के लिए पैसा। 

वहीं कुली संघ के अध्यक्ष सुरेश यादव ने बताया कि लॉकडाउन का पालन कुली समाज तहे दिल से कर रहा है। सरकार से हमारी मांग थी कि जिस तरह से समाज के अन्य वर्गों को सरकार मदद दे रही है उसी तरह हम लोगों के लिए भी पैकेज दिया जाए जिससे हम भी अपने परिवार का संचालन कर सकें। हमने ट्वीट और पत्र के माध्यम से सरकार को अवगत कराया लेकिन किसी ने हमारी मांग नहीं सुनी। आज कुली वर्ग भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। देशभर में 19762 कुली हैं जो शहर और गांव दोनों से विलांग करते हैं। इसमें कुछ लोग गांव चले गए हैं और कुछ स्टेशनों पर ही फंसे पड़े हैं। जो शहर में हैं उन्हें किसी तरह कुछ न कुछ मिल जा रहा है पर जो गांव में हैं उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। मैंने मांग की थी सरकार हमलोगों के लिए पैकेज दे जिससे हमें जीने में दिक्कत न होती। लेकिन भारत सरकार ने अबतक कुछ नहीं किया। यूपी सरकार ने मात्र दो जिलों झांसी और फैजाबाद के कुलियों को 1000-1000 रुपये मुहैया कराया है बाकी अभी भी वंचित हैं। 

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