ब्रिटिश इंजीनियरों ने भी टेके घुटने! काल भैरव की इस विशाल मूर्ति का रहस्य, जो सदियों से है लेटी हुई

रीवा: गुढ़ विधानसभा क्षेत्र स्थित खामाडीह गांव में काल भैरव की लेटी हुई विशाल प्रतिमा जमीन पर स्थापित है. भगवान काल भैरव की यह अद्भुत प्रतिमा 10वीं व 11वीं शताब्दी के मध्य की है. यहां पर साल भर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने आते हैं. लम्बे समय से उपेक्षा के शिकार इस क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया, लेकिन अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है.
सिंगल चट्टान को तराश के बनाई गई है प्रतिमा
इतिहासकार असद खान ने बताया कि “एक हजार वर्ष पूर्व युवराज देव द्वितीय का गुढ़ क्षेत्र आध्यात्मिक केंद्र हुआ करता था. उनके द्वारा कई मंदिरों का निर्माण कराया गया था जिसमें काल भैरव की प्रतिमा भी शामिल है. लगभग 11वीं शताब्दी पुरानी काल भैरव की प्रतिमा 8.50 मीटर लंबी और 3.70 मीटर चौड़ी है जो कर्चुली कालीन है.
इंग्लैंड के इंजीनियर भी नहीं खड़ी कर पाए प्रतिमा
असद खान ने बताया कि, “कालभैरव की यह प्रतिमा पूरे विश्व में अद्वितीय मानी जाती है. भैरव नाथ की प्रतिमा जमीन पर लेटी है. इस प्रतिमा का निर्माण एक ही चट्टान को तराश कर किया गया है. वहीं, काल भैरव की विशाल प्रतिमा जिस पत्थर को तराश कर बनाई गई है, वह पत्थर आसपास के क्षेत्र में कही भी नहीं पाया जाता. इसके साथ ही कई दशक पूर्व आजादी के पहले ब्रिटिश हुकूमत के दौरान प्रतिमा को खड़ा करने की कोशिश की गई. इस कार्य के लिए इंग्लैंड से कई इंजीनियर भी बुलाए गए, लेकिन मूर्ति खड़ी नहीं हो पाई.”
भैरव नाथ धाम बना काल भैरव लोक
साल 2020 में मंदिर को नया और भव्य रूप देने की कार्य योजना बनाई गई. जिसके बाद काम शुरू किया गया और 5 साल बाद अब मंदिर का भव्य रूप बनकर तैयार हो चुका है. इसके निर्माण में जयपुर के मार्बल का इस्तेमाल किया गया. मंदिर निर्माण के बाद अब यह धाम, काल भैरव लोक कहा जाने लगा है. मंदिर का लोकार्पण 31 जनवरी को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे.
कालभैरव की यह प्रतिमा ऐतिहासिक और दुर्लभ है. इस प्रतिमा में भगवान के दाईं ओर हाथ में रुद्राक्ष की माला है, तो बाएं तरफ एक हाथ में सर्प और दूसरे हाथ में कलश है. गले में भी रुद्राक्ष की माला और सर्प लिपटे हुए हैं. कमर में सिंह मुख का अंकन है. प्रतिमा के दोनों ओर एक खड़े हुए, एक बैठे हुए पूजक का अंकन है.
लोकार्पण के दौरान ही फहराया जाएगा धर्म ध्वज
गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने बताया कि “गुढ़ विधासभा क्षेत्र में देश की सबसे विशाल भैरोनाथ की प्रतिमा स्थापित है. मंदिर का कायाकल्प कराकर भव्य रूप दिया गया है. मंदिर का लोकार्पण 31 जनवरी को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे. लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान ही मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराया जाएगा. इसके साथ ही मंदिर के संचालन के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाएगा, जिसके प्रेसिडेंट कलेक्टर होंगे. वहीं, गुवाहाटी के ऋषिराज एक विद्वान पुजारी हैं, जिनकी मंदिर में पदस्थापना के लिए चर्चा की जा रही हैं. इनके द्वारा देश में कई काल भैरव मंदिर का निर्माण भी कराया गया हैं.”
3 करोड़ की लागत से कराया मंदिर का कायाकल्प
विधायक नागेंद्र सिंह ने बताया कि “मंदिर प्रांगण में एक संस्कृत स्कूल और विशाल गौशाला बनाये जाने की योजना भी बनाई जा रही है. इसके अलावा स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए एक बड़ी आईटीआई खोले जाने की योजना है. करीब 3 करोड़ की लागत से मंदिर का कायाकल्प कर उसे भव्य रूप दिया गया गया है. मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फिलहाल कोई खास इंतजाम नहीं है. सुरक्षा गार्ड नियुक्त हैं, लेकिन एक पुलिस चौकी के लिए मुख्यमंत्री से मांग की जाएगी.”






