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WHO ने कहा, कोरोना से बच्‍चों को ज्‍यादा खतरा नहीं, बहुत कम बच्‍चों में पाए गए हैं गंभीर लक्षण

जेनेवा। कोविड-19 के संकट के बीच एक सुकून देने वाली खबर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि कोविड-19 की चपेट में आने वाले ज्यादातर बच्चों में इसके लक्षण हल्के होते हैं और बच्चे पूरी तरह ठीक भी हो जाते हैं। कुछ देशों में बहुत थोड़े बच्चों में ही कोरोना के कारण स्थिति गंभीर होने का प्रमाण मिला है। फिलहाल इटली और ब्रिटेन के शोधकर्ता यह समझने की कोशिश में हैं कि यहां कुछ नवजात शिशुओं में लक्षण बहुत गंभीर क्यों हुए हैं। यहां कुछ शिशुओं को तेज बुखार और सूजी हुई धमनियों के साथ भर्ती कराया गया है।

रेमडेसिविर हो सकती है कारगर

अमेरिका में तीन बच्चों में उस तरह के लक्षण मिले हैं, जैसे ब्रिटेन, इटली और स्पेन में दिखे हैं। डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञ डॉ. माइक र्यान ने कहा, ‘मैं जोर देकर कहना चाहूंगा कि कोरोना से संक्रमित होने वाले ज्यादा से ज्यादा बच्चों में लक्षण हल्के होते हैं और बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।’ र्यान ने बायोटेक कंपनी गिलियड साइंसेज के उस दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की, जिसमें कंपनी ने कहा है कि उसकी एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर कोविड-19 के इलाज में सहायक हो सकती है।

कुछ बच्चों में बिगड़ जाती है स्थिति

बच्चों में कोरोना संक्रमण को लेकर विशेषज्ञ सतर्क हैं और लगातार यह समझने के प्रयास में हैं कि आखिर कुछ बच्चों की स्थिति गंभीर क्यों हो जाती है। चिकित्सकों को ऐसे मामलों में सतर्कता बरतने और पूरी जानकारी जुटाने को कहा गया है, जिससे इसे समझना संभव हो सके।

अब भी वायरस की गिरफ्त में है यूरोप

डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय कार्यालय के प्रमुख डॉ. हैंस क्लूज ने चेताया है कि यूरोप अब भी इस महामारी की गिरफ्त में है। उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि कई यूरोपीय देश अपने यहां पाबंदियों में छूट देने लगे हैं। डॉ. क्लूज ने कहा कि मामलों पर कुछ नियंत्रण मिला है और केवल फिजिकल डिस्टेंसिंग की बदौलत संभव हुआ है। इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन में अब भी मामलों की संख्या बहुत कम है और बेलारूस, रूस, यूक्रेन में मामले भी बढ़ रहे हैं। हमें सतर्क रहने की जरूरत है। यह महामारी अभी बहुत जल्दी नहीं खत्म होने वाली है।

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