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मध्यप्रदेश

इंसानियत आज भी जिंदा है! खून से लथपथ सड़क पर तड़प रही थीं बेटियां, मसीहा बनकर पहुंचा कार चालक

छिंदवाड़ा: दो मासूम बेटियां और पिता दुर्घटना होने के बाद सड़क के बगल में खून से लथपथ तड़प रहे थे. कई लोगों की भीड़ जमा थी. कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन भी किया और कुछ ने पुलिस को सूचना दी. लेकिन समय पर कोई नहीं पहुंचा. इस बीच एक राहगीर विजय वर्मा ने तीनों को अपनी कार में ले जाकर जिला अस्पताल में इलाज कराया, जहां बच्चियों की हालत खतरे से बाहर है.

खून से लथपथ मासूम बेटियों की राहगीर ने बचाई जिंदगी
अपने पिता राजलाल मरावी के साथ राशि और माही सिंगोड़ी से छिंदवाड़ा की तरफ आ रही थीं. अचानक अज्ञात वाहन से उनकी बाइक की टक्कर हो गई. दोनों बेटियां और पिता बुरी तरीके से घायल हो गए. खून से लथपथ बेटियों के साथ पिता तड़प रहे थे. दुर्घटना के बाद देखने वालों की भीड़ भी लगी. कुछ लोगों ने एंबुलेंस को फोन लगाया तो कुछ ने पुलिस को सूचना दी. लेकिन समय पर कोई नहीं पहुंचा.

रास्ते से गुजर रहे कार चालक विजय वर्मा ने भीड़ को देखकर अपनी कार को रोका और जब भीड़ में अंदर गए तो देखा कि मासूम बेटियों तड़प रही हैं. एंबुलेंस और पुलिस दोनों को आने में काफी देर लग रही थी, तो उन्होंने अपनी कार में ही दोनों बेटियां और उनके पिता को बैठाया और जिला अस्पताल पहुंचकर समय पर इलाज करवाया.

समय पर मिला इलाज, तीनों की बची जान
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर सुशील दुबे ने बताया, ”दोनों बेटियां और उनके पिता गंभीर हालत में छिंदवाड़ा लाए गए थे. सही समय पर राहगीर विजय वर्मा उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे. जिला अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने तुरंत उनका इलाज शुरू कर दिया था. इसके बाद तीनों की हालत अब खतरे से बाहर है.”

सिविल सर्जन का कहना है कि, ”सड़क दुर्घटना के दौरान समय पर अस्पताल पहुंचाना और इलाज होना ही लोगों की जिंदगी बचाता है. कई बार देखा जाता है कि लोग सड़क पर तमाशबीन बने रहते हैं, लेकिन ऐसे समय पर लोगों की मदद करना चाहिए. रास्ते से गुजर रहे विजय वर्मा ने भी सूझबूझ का परिचय देते हुए तीनों को जिला अस्पताल पहुंच कर उनकी जान बचाई.”परेशानी से बचने के लिए मदद करने से डरते हैं लोग
दुर्घटना हो जाने के बाद घायलों को अगर कोई अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करता था, तो कई तरह की पूछताछ होती थी. जिससे मदद करने वालों को भी परेशानियां होती थी. इसके चलते कई लोग मदद से डरते थे. मध्य प्रदेश सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायल की मदद करने के लिए गोल्डन ऑवर यानि पहले घंटे 1 के भीतर अस्पताल पहुंच कर जान बचाने वाले लोगों को पुरस्कार देने की भी शुरुआत की है, जिसे राहवीर योजना कहा जाता है. इसमें मदद करने वाले को ₹25000 का मध्य प्रदेश सरकार के गृह विभाग के द्वारा इनाम दिया जाता है.

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