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छत्तीसगढ़

Agriculture Update: सिंचाई संकट होगा दूर; बगिया एम कैड योजना के जरिए हर खेत को मिलेगा पानी, किसानों को बड़ा लाभ

जशपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया. करीब 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए कांसाबेल विकासखंड के 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को आधुनिक सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा.

हर बूंद से खेतों तक समृद्धि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच को साकार करने वाला मॉडल है. उन्होंने कहा कि इस योजना के सफल क्रियान्वयन के बाद जशपुर आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली के क्षेत्र में देश का मॉडल जिला बनकर उभरेगा.

बारिश के पानी पर किसान की निर्भरता होगी कम

सीएम ने कहा कि अब तक क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थे, जिससे उत्पादन प्रभावित होता था. लेकिन नई परियोजना लागू होने के बाद खेतों तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचेगा और किसानों की फसल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. उन्होंने बताया कि इस योजना में पारंपरिक खुली नहरों के स्थान पर भूमिगत प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल की बर्बादी रुकेगी और भूमि अधिग्रहण की समस्या भी नहीं आएगी.

मैनी नदी से जुड़ेगी सिंचाई व्यवस्था, 13 गांवों को मिलेगा लाभ

यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से संचालित की जाएगी. योजना के तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.

सीएम ने बताया कि देश के 23 राज्यों में कुल 34 एम-कैड परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित क्षेत्र है. इस परियोजना के लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है.

छह महीने में पूरा होगा कार्य, सौर ऊर्जा से चलेगी परियोजना

समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में किया गया था. उन्होंने बताया कि बगिया दाबित सिंचाई प्रणाली का निर्माण कार्य छह माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसकी विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा आधारित होगी, साथ ही आधुनिक “सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA)” एवं “इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)” जैसी तकनीकों का उपयोग कर वैज्ञानिक तरीके से जल प्रबंधन किया जाएगा. डेटा आधारित प्रणाली से यह तय किया जाएगा कि किस खेत को कब और कितनी मात्रा में पानी उपलब्ध कराना है.

जल उपभोक्ता समितियों को मिलेगी जिम्मेदारी, महिलाओं की भी भागीदारी

योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए जल उपभोक्ता समितियों का गठन किया जाएगा. प्रारंभिक पांच वर्षों तक संचालन एवं संधारण का कार्य ठेकेदार द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद इसकी जिम्मेदारी समितियों को सौंप दी जाएगी. इसमें महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है.

अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना से जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी, खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय में स्थायी सुधार आएगा.साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में भी किसानों को मदद मिलेगी.

केंद्रीय मंत्री और कृषि मंत्री ने बताया किसानों के लिए वरदान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि सिंचाई योजना से गांवों का सर्वांगीण विकास होगा और खेतों तक समुचित जल आपूर्ति पहुंचने से किसान अधिक समृद्ध और खुशहाल बनेंगे.

वहीं कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि बगिया क्लस्टर सिंचाई योजना आने वाले समय में किसानों के लिए वरदान साबित होगी. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और क्षेत्र में कृषि आधारित रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

कार्यक्रम में रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, आईजी दीपक झा, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, डीएफओ शशि कुमार, एडीएम प्रदीप साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे.

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